प्रशस्ति पत्र देकर बचाया गया आरोपी राजस्व निरीक्षक..? आईएएस संरक्षण में दबा घोटाला,जांच बनी मजाक...लखनादौन में राजस्व तंत्र पर गंभीर सवाल..?

27 Jan, 2026 756 व्यूज
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सिवनी/लखनादौन-नायक दर्पण

लखनादौन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय में पदस्थ डायवर्सन राजस्व निरीक्षक कन्हैयालाल शिवहरे पर नियमों को ताक पर रखकर आवासीय भूमि को कृषि भूमि में बदलने और बदले में आर्थिक लाभ लेने के गंभीर आरोप हैं। तथ्यों के साथ की गई शिकायतें जिला कलेक्टर और कमिश्नर कार्यालय तक पहुँची लेकिन जांच नहीं हुई आखिर क्यों...? जब शिकायत लिखित रूप में उपलब्ध है तब कलेक्टर ने अब तक जांच के आदेश क्यों नहीं दिए..? क्या राजस्व तंत्र में बैठे कुछ अधिकारी कानून से ऊपर हैं..? डायवर्सन मामलों में हुई हेराफेरी को लेकर जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है वही जांच को भी प्रभावित करते नजर आए क्या यह खुला संरक्षण नहीं..?और चौंकाने वाली बात यह कि जिन पर अनियमितताओं के आरोप हैं उन्हें गणतंत्र दिवस पर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। क्या यह ईमानदार अधिकारियों का अपमान नहीं..? क्या प्रशस्ति पत्र अब “वफादारी प्रमाणपत्र” बन गए हैं..? लखनादौन के आईएएस अधिकारी रवि सिहाग पर भी आरोप है कि वे शिकायतकर्ता को न्याय दिलाने के बजाय राजस्व निरीक्षक को बचाने में लगे हैं। अब तक कार्रवाई शून्य क्यों..?
कलेक्टर से सीधे सवाल....!
लिखित शिकायत के बावजूद जांच आदेश क्यों नहीं..?
दोषी पर कार्रवाई के बजाय संरक्षण किसके निर्देश पर..?
जांच में हुई कथित हेराफेरी की जवाबदेही किसकी..?
क्या प्रशस्ति पत्र भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का जरिया बन चुके हैं..? क्या आम जनता के लिए कानून अलग और “खास अधिकारियों” के लिए अलग..?
जिला प्रशासन की चुप्पी अब संदेह को और गहरा कर रही है। सवाल यह नहीं कि शिकायत सही है या गलत सवाल यह है कि जांच से डर किसे है...?
इस पूरे मामले की तथ्यों सहित शिकायत जिला कलेक्टर और कमिश्नर कार्यालय में की गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक न तो जांच शुरू हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई। उल्टा आरोप है कि लखनादौन के आईएएस अधिकारी रवि सिहाग राजस्व निरीक्षक को बचाने में लगे हुए हैं। डायवर्सन मामलों में हेराफेरी के आरोपों के बावजूद विभागीय जांच भी सवालों के घेरे में है। शिकायत की जांच में भी कथित तौर पर लीपापोती की गई। इससे प्रशासन की मंशा पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन पर भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप हैं, उन्हें गणतंत्र दिवस पर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। अधिकारी “खास” माने जाते हैं और इसी कारण आज तक कार्रवाई शून्य है। आखिर यह कैसी विभागीय नीति है, जहां शिकायतें फाइलों में दब जाती हैं और आरोपित सुरक्षित रहते हैं...?