सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फरमान...बेटियों के सम्मान पर समझौता अब अपराध...सुविधा नहीं देने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द होगी...!

31 Jan, 2026 99 व्यूज
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सिवनी नायक दर्पण

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसने शिक्षा व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा है जो स्कूल बेटियों को निःशुल्क सैनिटरी पैड नहीं दे सकते उन्हें स्कूल चलाने का अधिकार नहीं।इस फैसले का जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला न्यायालय सिवनी की पैरालीगल वालंटियर श्रीमती राजेश्वरी सिंह ठाकुर ने स्वागत करते हुए इसे बेटियों के सम्मान और स्वास्थ्य की दिशा में मील का पत्थर बताया।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों में छात्राओं को निःशुल्क सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं।छात्राओं और छात्रों के लिए अलग-अलग शौचालय सुनिश्चित हों।सभी स्कूलों में दिव्यांगजनों के अनुकूल शौचालय अनिवार्य रूप से बनाए जाएं।कोर्ट ने दो टूक कहा कि मासिक धर्म संबंधी स्वास्थ्य संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।
यदि कोई निजी स्कूल इन आदेशों का पालन करने में विफल रहता है तो उसकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।
गौरतलब है कि यह फैसला 10 दिसंबर 2024 को दायर जनहित याचिका पर आया है जिसमें कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति को देशभर में लागू करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अब चेतावनी है शिक्षा तभी जब सम्मान और स्वास्थ्य भी साथ हो।