पंचायत को बनाया कठपुतली,विधायक मुंजारे के पीए ने खुद बिछाई सीसी सड़कें। खनिज मद की सीसी सड़कें बनीं निजी सहायक का निजी प्रोजेक्ट? बालाघाट–लालबर्रा क्षेत्र में भ्रष्टाचार की गूंज।
31 Jan, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
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विधानसभा क्षेत्र बालाघाट–लालबर्रा में सीसी सड़कों के निर्माण को लेकर एक बड़ा और गंभीर मामला सामने आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्रीय विधायक अनुभा मुंजारे के निजी सहायक (पीए) पर पंचायत स्तर पर सरकारी निर्माण कार्यों में सीधा हस्तक्षेप करने स्वीकृति दिलाने और स्वयं ठेकेदार की भूमिका निभाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। यह पूरा मामला न केवल पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। बल्कि शासन की खनिज मद से संचालित योजनाओं के दुरुपयोग की ओर भी इशारा करता है। सूत्रों के अनुसार जनपद पंचायत लालबर्रा अंतर्गत आने वाली कई ग्राम पंचायतों और ग्रह ग्राम की पंचायत में गौण खनिज मद से सीसी सड़कों की स्वीकृति दिलाई गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कुछ सड़कों का निर्माण ऐसे स्थानों पर कराया गया, जहां न तो आवश्यकता थी और न ही ग्रामीणों की मांग। वहीं जिन स्थानों पर वास्तविक जरूरत थी, वहां या तो कार्य नहीं हुआ या उसे नजरअंदाज कर दिया गया।
पंचायत बनी नाम मात्र की एजेंसी:– सूत्रों से जानकारी के मुताबिक इन निर्माण कार्यों में ग्राम पंचायतों को केवल कागजों में निर्माण एजेंसी दिखाया गया। जबकि वास्तविक नियंत्रण और संचालन विधायक के निजी सहायक (पीए) के हाथ में रहा। सूत्र बताते हैं कि सामग्री की खरीद, मजदूरों की व्यवस्था, मस्टर रोल से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया पर भी निजी सहायक का ही दबदबा रहा। स्थानीय ग्रामीणों की माने तो पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका लगभग शून्य रही। कई सरपंच और सचिव नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार करते हैं कि उन्हें ऊपर से निर्देश मिलते थे और विरोध करने की स्थिति में उन्हें परेशान किए जाने का भय रहता था।
गुणवत्ता पर भारी लापरवाही:– ग्रामीणों की शिकायत है कि जिन सीसी सड़कों का निर्माण हुआ है, उनकी गुणवत्ता बेहद निम्न स्तर की है। कई जगह सड़क निर्माण के कुछ ही महीनों में दरारें आ गईं, कहीं सतह उखड़ने लगी तो कहीं किनारे टूट गए। निर्माण में उपयोग की गई सीमेंट, गिट्टी और रेत की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने हमारी टीम को नाम ना छापने के शर्त में आरोप लगाते हुए बताया है कि मानकों के अनुसार मोटाई नहीं रखी गई, क्योरिंग नहीं की गई और इंजीनियरिंग नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई। इससे साफ संकेत मिलता है कि निर्माण कार्य केवल राशि निकालने के उद्देश्य से जल्दबाजी में कराया गया।
स्वीकृति भी, ठेकेदारी भी!:– सबसे गंभीर आरोप यह है कि विधायक का निजी सहायक पंचायत स्तर पर निर्माण कार्यों की स्वीकृति दिलाने में प्रभाव का उपयोग करता है और बाद में स्वयं ही ठेकेदार बनकर उसी कार्य को अंजाम देता है। सूत्रों का कहना है कि निजी सहायक पंचायत और जनपद कार्यालयों में इतना प्रभाव रखता है कि बिना उसकी सहमति के कोई निर्माण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाता। इससे जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में आ जाती है। सीसी सड़कों की दुर्दशा और कथित भ्रष्टाचार को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है ग्रामीण कहते है सरकारी धन जनता की सुविधा के लिए होता है, न कि किसी खास व्यक्ति के लाभ के लिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते स्वतंत्र जांच नहीं कराई गई, तो यह मामला भविष्य में और बड़ा रूप ले सकता है।
नायक दर्पण करेगा खुलासा:– नायक दर्पण की टीम इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। अगले अंक में विधायक अनुभा मुंजारे के निजी सहायक (पीए) का नाम,तस्वीर संबंधित ग्राम पंचायतों की सूची और सीसी सड़क निर्माण से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य प्रकाशित किए जाएंगे। साथ ही यह भी उजागर किया जाएगा कि किस प्रकार पंचायत व्यवस्था को दरकिनार कर सरकारी धन का उपयोग किया गया।
जनहित में जवाब जरूरी:– लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों और उनके सहयोगियों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है। यदि आरोप सही हैं, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी सरकारी योजनाओं को निजी कमाई का साधन न बना सके। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेता है या फिर यह प्रकरण भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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