अतिक्रमण पूरे शहर में कार्रवाई सिर्फ गरीबों पर क्यों..?निष्पक्षता गायब पक्षपात हाजिर नगर पालिका की कार्रवाई से जनता नाराज...ठेला टूटा, दुकान उजड़ी पालिका की मार से परिवार भुखमरी की कगार पर...
31 Jan, 2026
210 व्यूज
सिवनी। नायक दर्पण
नगरपालिका परिषद सिवनी द्वारा शहर में अतिक्रमण हटाने के नाम पर की जा रही कार्रवाई अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। बीते 15 दिनों के भीतर दूसरी बार नगर पालिका ने कचहरी चौक से लेकर एलआईसी ऑफिस तक सड़क किनारे लगी छोटी-छोटी दुकानों और ठेलों को अतिक्रमण बताकर हटा दिया। इस कार्रवाई से दर्जनों गरीब दुकानदारों का रोजगार छिन गया और सैकड़ों परिवारों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
कार्रवाई के दौरान कई दुकानदारों का सामान सड़क पर बिखर गया। किसी का ठेला उजड़ गया तो किसी की वर्षों से लगी छोटी दुकान, जिससे वे किसी तरह अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। दुकानदारों का आरोप है कि नगर पालिका बिना कोई स्थायी या वैकल्पिक व्यवस्था किए, बार-बार उनकी दुकानों को हटाकर उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ रही है।
पूरे शहर में अतिक्रमण, कार्रवाई सिर्फ गरीबों पर...?
इस कार्रवाई को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब पूरे शहर में अतिक्रमण फैला हुआ है, तो कार्रवाई केवल कुछ ही इलाकों तक सीमित क्यों है? स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों का कहना है कि बुधवारी बाजार, शुक्रवारी चौक, डूंडासिवनी चौक, छिंदवाड़ा चौक, बस स्टैंड क्षेत्र, पोस्ट ऑफिस से सोमवारी चौक भैरोगंज तक बड़े पैमाने पर अतिक्रमण मौजूद है, लेकिन वहां नगर पालिका की सख्ती नज़र नहीं आती।
लोगों का आरोप है कि जहां बड़े व्यापारी और प्रभावशाली लोग हैं, वहां नगर पालिका आंख मूंदे रहती है, जबकि गरीब और छोटे दुकानदारों को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है।
रोज़गार छिना, परिवार संकट में...
दुकानदारों ने बताया कि वे वर्षों से यहां छोटी दुकान या ठेला लगाकर किसी तरह जीवन यापन कर रहे थे। अचानक और बार-बार की जा रही कार्रवाई से न केवल उनकी आमदनी बंद हो गई है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया और रोज़मर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।
कई दुकानदारों ने कहा कि यदि यही हाल रहा तो उन्हें शहर छोड़ने या दिहाड़ी मजदूरी करने को मजबूर होना पड़ेगा।
जनता में आक्रोश, समान कार्रवाई की मांग...
नगर पालिका की इस कथित पक्षपातपूर्ण कार्रवाई को लेकर शहर में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि यदि अतिक्रमण हटाना है तो पूरे शहर में समान, निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई की जाए। साथ ही गरीब दुकानदारों के लिए वैकल्पिक स्थान और स्थायी व्यवस्था किए बिना उनकी दुकानों को हटाना अमानवीय है।
शेयर करें
लिंक कॉपी हो गया!