शिवरात्रि पर निकलेगी विशाल त्रिशूल यात्रा,गुप्तेश्वर महादेव को चढ़ेगा त्रिशूल। मोहगांव खुर्द–भालवा से डोंगरगांव तक गूंजेगा महाकाल की जय का उद्घोष
04 Feb, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
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शिवभक्ति, आस्था और सनातन परंपरा का अनुपम संगम एक बार फिर क्षेत्र में देखने को मिलेगा। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार 15 फरवरी 2026 को प्रातः 7 बजे एक भव्य एवं विशाल त्रिशूल यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह यात्रा मोहगांव खुर्द, भालवा सहित समस्त ग्रामों का भ्रमण करते हुए डोंगरगांव स्थित गुप्तेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेगी, जहां विधिवत मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव को त्रिशूल अर्पित किया जाएगा। त्रिशूल यात्रा को लेकर क्षेत्र में विशेष उत्साह और धार्मिक उमंग का माहौल है। आयोजकों के अनुसार यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को एक सूत्र में बांधने वाली आस्था की धारा है, जिसमें मातृशक्ति, युवासाथी, वरिष्ठजन और नन्हे-मुन्ने बच्चे सभी सहभागी बनते हैं। यात्रा के दौरान चिंता ना भय, महाकाल की जय के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो जाएगा।
गांव-गांव पहुंचेगा शिवभक्ति का संदेश
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त्रिशूल यात्रा मोहगांव खुर्द से प्रारंभ होकर भालवा सहित आसपास के ग्रामों से गुजरते हुए डोंगरगांव पहुंचेगी। मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा स्वागत द्वार और श्रद्धालुओं द्वारा जलाभिषेक की व्यवस्था की जाएगी। ग्रामीणों ने अपने-अपने गांवों में इस सूचना को व्यापक रूप से प्रसारित करने का संकल्प लिया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पावन यात्रा में सम्मिलित हो सकें।
गुप्तेश्वर महादेव में होगा विशेष पूजन
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डोंगरगांव पहुंचने पर गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना रुद्राभिषेक और त्रिशूल चढ़ाने की धार्मिक विधि संपन्न होगी। विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान भोलेनाथ से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की जाएगी।
शिवभक्तों के सहयोग से विशाल भंडारा
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त्रिशूल यात्रा के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी की व्यवस्था रहेगी। आयोजकों ने बताया कि यह भंडारा आपसी सहयोग और सामूहिक सहभागिता से संपन्न होगा। क्षेत्र के प्रत्येक गांव के प्रमुख व्यक्तियों से अपील की गई है कि वे अपने-अपने स्तर पर सहयोग कर इस पुण्य कार्य को और अधिक भव्य बनाएं।
मातृशक्ति और युवाओं की विशेष सहभागिता
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इस धार्मिक आयोजन में मातृशक्ति की सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। साथ ही युवाओं से आह्वान किया गया है कि वे अनुशासन सेवा और समर्पण के भाव से यात्रा को सफल बनाएं। बच्चों की सहभागिता से यह आयोजन संस्कार, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण का संदेश भी देगा।
अपना कार्यक्रम समझकर सह परिवार आमंत्रण
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आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे इस त्रिशूल यात्रा को अपना निजी कार्यक्रम समझते हुए सह परिवार उपस्थित हों और शिवभक्ति के इस महापर्व को ऐतिहासिक बनाएं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक चेतना का भी उदाहरण है।
सनातन संस्कृति की जीवंत झलक
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हर वर्ष की तरह इस बार भी त्रिशूल यात्रा के माध्यम से सनातन संस्कृति, परंपरा और श्रद्धा की जीवंत झलक देखने को मिलेगी। शिवभक्तों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपने धर्म और संस्कारों से जोड़ने का सशक्त माध्यम मिलता है। अंत में आयोजक मंडल एवं समस्त शिवभक्तों ने क्षेत्र के नागरिकों से निवेदन किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस पावन त्रिशूल यात्रा में सम्मिलित होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें और आयोजन को सफल बनाएं।
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