कमीशन की भूख में गिरवी पड़ा मनरेगा...पंचायत में लोकतंत्र की हत्या...लॉगिन आईडी का खेल...नियमों की खुलेआम धज्जियां...
05 Feb, 2026
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नारायणगंज/मंडला।नायक दर्पण
ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन रोकने की जिम्मेदारी जिस पंचायत व्यवस्था पर है, वही व्यवस्था अगर कथित कमीशनखोरी और मिलीभगत का अड्डा बन जाए, तो योजनाओं का जनहित से भटकना तय है। ऐसा ही चौंकाने वाला और गंभीर मामला ग्राम पंचायत देवहार और देवगांव से सामने आया है, जहां ग्रामीण रोजगार योजनाएं अब सवालों के घेरे में आ चुकी हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि देवहार पंचायत में सचिव दीप चंद साहू और रोजगार सहायक विनोद परस्ते की आपसी मिलीभगत से स्थानीय मजदूरों को जानबूझकर रोजगार से वंचित किया जा रहा है। नियमों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद गांव के कार्यों में बाहरी गांवों के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि गांव के गरीब मजदूर और जरूरतमंद लोग काम के लिए भटकने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि रोजगार कार्यों में कमीशन की कथित व्यवस्था हावी है। जिन लोगों से निजी लाभ सुनिश्चित होता है, काम उन्हीं को दिया जाता है। हैरानी की बात यह है कि कागजों में रोजगार पूरा दिखाया जा रहा है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
देवहार में हालात और भी चिंताजनक बताए जा रहे हैं। पंचायत के अधिकांश कार्यों की जिम्मेदारी सिर्फ एक चुने हुए मेंबर को सौंपी गई है, जबकि बाकी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को योजनाबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। यह न केवल पंचायत की सामूहिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था का खुला उल्लंघन है बल्कि भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है।
वहीं देवगांव पंचायत में भी नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में अधिकृत मेट मौजूद होने के बावजूद दूसरे गांव के मेट को लॉगिन आईडी देकर काम कराया जा रहा है। यह मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संभावित फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितताओं की ओर भी संकेत करता है।
जब न स्थानीय मेट को अधिकार मिल रहे हैं न सभी निर्वाचित मेंबरों की भूमिका सुनिश्चित की जा रही है, तो साफ है कि रोजगार योजनाओं का उद्देश्य पलायन रोकना नहीं, बल्कि कमीशन कमाना बनता जा रहा है। इसका सीधा खामियाजा गांव के युवा और श्रमिक भुगत रहे हैं, जो मजबूरी में रोज़गार की तलाश में गांव छोड़ने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि सचिव दीप चंद साहू और रोजगार सहायक विनोद परस्ते की मिलीभगत के आरोप सही पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि गांव का काम गांव के लोगों को ही मिले।
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