RTI से बचता घंसौर परियोजना विभाग...कानून को ठेंगा दिखा रहे जिम्मेदार अधिकारी... महिला-बाल विकास कार्यालय में पारदर्शिता का अकाल...RTI से डर क्यों...?
05 Feb, 2026
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घंसौर/सिवनी नायक दर्पण
सूचना अधिकार अधिनियम को लोकतंत्र की रीढ़ कहा जाता है, लेकिन सिवनी के महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस कानून को कागज का खिलौना बना कर रख दिया है। यहां RTI आवेदन देना मतलब जवाब नहीं बल्कि सन्नाटा खरीदना है।
RTI के तहत मांगी घंसौर महिला एवं बाल विकास परियोजना घंसौर के संबंध पर जानकारी चाही गई थी जो सिवनी जिले के महिला बाल विकास से घंसौर परियोजना को भेजी गई जिसमें स्पष्ट उल्लेख था कि जानकारी समय सीमा में आवेदक को दिया जाए पर घंसौर परियोजना द्वारा समय अवधि में जानकारी नहीं दिया गया जो सूचना अधिनियम की धज्जियां उड़ा कर पारदर्शिता की जगह मनमानी और लापरवाही हावी होने के संकेत को दर्शाता है
RTI एक्ट के तहत 30 दिनों में जानकारी देना अनिवार्य है, लेकिन यहां नियमों को खुलेआम नजरअंदाज किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या विभाग किसी गड़बड़ी को छिपाने की कोशिश कर रहा है..? या फिर अधिकारियों को कानून का कोई भय नहीं रहा..?जब महिला एवं बाल विकास जैसे संवेदनशील विभाग में ही जवाबदेही खत्म हो जाए तो योजनाओं के सही क्रियान्वयन पर सवाल उठना लाजमी है।क्या जिला सिवनी महिला बाल विकास के जिम्मेदार अधिकारी संज्ञान ले कर जानकारी दिला पाऐगे..? अब सवाल सिर्फ RTI का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम की साख का है। अगर इस खुलेआम हो रही मनमानी पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो यह मान लिया जाए कि सिवनी में कानून नहीं, बल्कि अफसरों की मर्जी का राज चल रहा है।
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