काला है विधायक का काम, निराला है PA का नाम! सरपंच के पत्र और ऑडियो ने बेनकाब किया सारा काम। विधायक मुंजारे के PA निराला बघेले का काला खेल! सत्ता की छाया में सिस्टम की लूट! विधायक के PA निराला बघेले पर ठेके–धमकी–सरकारी धन की विधायक अनुभा ने दी शूट।
06 Feb, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
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बालाघाट-लालबर्रा विधानसभा क्षेत्र में सत्ता की छाया में चल रही ठेकेदारी की काली करतूतें अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी हैं। क्षेत्रीय विधायक अनुभा मुंजारे के निजी सहायक (PA) निराला सिंह बघेले पर लगे गंभीर आरोपों ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि जनता के बीच सवालों की बौछार खड़ी कर दी है। सरकारी निर्माण कार्यों में सीधा हस्तक्षेप, स्वीकृति दिलाने के नाम पर दबाव और खुद ठेकेदार बनकर करोड़ों की योजनाओं को लूटने का खेल यह सब अब सरपंच के एक पत्र और ऑडियो से सामने आ गया है। क्या यह विधायक की मिलीभगत है या सिर्फ PA की मनमानी? विधायक मुंजारे ने खुद सीसी सडक की जांच की मांग की है, लेकिन उनके चुप्पी साधने से साफ लगता है कि कहीं न कहीं सांप सूंघ गया है। नायक दर्पण ने इस पूरे घोटाले की परतें अगले अंक में बताने की बात कही थी, जहां ईमानदारी का दावा करने वाली विधायक अनुभा मुंजारे अपने ही निजी सहायक PA की करतूतों पर पर्दा डाल रही हैं।
मामला शुरू होता है जनपद पंचायत लालबर्रा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों से यहां प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत गौण खनिज मद से सीसी सड़कों की स्वीकृति दी गई थी। कागजों पर तो ये निर्माण कार्य ग्राम पंचायतों के नाम थे, लेकिन हकीकत में सारा नियंत्रण निराला सिंह बघेले के हाथों में था। सूत्रों के मुताबिक निराला बघेले न सिर्फ स्वीकृति दिलाने में अपना प्रभाव इस्तेमाल करते थे, बल्कि बाद में खुद ठेकेदार बनकर काम को अंजाम देते थे। पंचायत स्तर पर उनका इतना दबदबा है कि बिना उनकी मर्जी के कोई प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ता। यह कैसी लोकतंत्र की मिसाल है, जहां एक विधायक का PA पंचायतों को अपनी जेब में रखकर सरकारी पैसों की बंदरबांट कर रहा हो?
सबसे चौंकाने वाला खुलासा आया है ग्राम पंचायत मोहगांव (धा) के सरपंच के पत्र और ऑडियो से सरपंच ने विधायक अनुभा मुंजारे को लिखे पत्र में साफ-साफ बताया है कि वार्ड नंबर 1 के साम खोगाटोला में स्वीकृत सीसी सड़क पर निराला बघेले ने जबरन कब्जा कर लिया। सरपंच के मुताबिक बघेले ने कहा यह सड़क और अन्य सड़कें मैंने ही लाई हैं। इन्हें मैं ही बनवाऊंगा। सरपंच ने उन्हें पंचायत में बैठने के लिए कहा लेकिन बघेले ने फोन पर बात की और सरपंच की कोई नहीं सुनी। सरपंच ने समझाने की कोशिश की कि अगर एजेंसी पंचायत है तो जिम्मेदारी भी हमारी होगी, लेकिन बघेले ने धमकी देते हुए कहा "अगर मैंने काम नहीं किया तो तुम्हें दूसरा काम नहीं मिलेगा" डराकर काम करवाया गया और सड़क बनी भी तो घटिया स्तर की सरपंच ने पत्र में लिखा है कि अगर आगे कोई समस्या हुई तो सारी जिम्मेदारी निराला बघेले की होगी। यह पत्र न सिर्फ बघेले की धमकियों को उजागर करता है, बल्कि पूरे सिस्टम की सड़ांध को सामने लाता है।
और ऑडियो? वह तो और भी तीखा सबूत है। ऑडियो में बघेले की आवाज साफ सुनाई देती है, जहां वे सरपंच को डराते-धमकाते हैं और काम पर अपना हक जताते हैं। यह ऑडियो नायक दर्पण की टीम के पास पहुंचा है। लेकिन अभी से साफ है कि निराला सिंह बघेले का नाम अब निराला नहीं बल्कि काला हो चुका है। क्या यह सिर्फ एक PA की करतूत है या विधायक मुंजारे की छत्रछाया में चल रहा खेल? सवाल तो यही है कि ईमानदार छवि वाली मुंजारे अब तक चुप क्यों हैं? सरपंच के पत्र के बाद भी उन्होंने बघेले को कार्यालय से क्यों नहीं हटाया? क्या यह सब उनके इशारे पर हो रहा है?
विधायक मुंजारे ने खुद कलेक्टर बालाघाट को पत्र लिखकर जांच की मांग की है। उनके पत्र में लिखा है कि वर्ष 2023-24 में स्वीकृत सीसी सड़कों का निर्माण घटिया स्तर का है। उन्होंने कहा यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि शासकीय राशि के दुरुपयोग का गंभीर मामला है। निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई, जिससे करोड़ों की योजना सवालों के घेरे में है। मुंजारे ने मांग की है कि त्वरित जांच टीम गठित कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। लेकिन यह पत्र कितना ईमानदार है? जब खुद का PA इसमें लिप्त है, तो क्या जांच सिर्फ दिखावा है? क्षेत्र में जनचर्चा है कि अगर सड़कें गुणवत्ताविहीन पाई गईं तो सरपंच और सचिव क्यों दोषी ठहराए जाएंगे? निर्माण तो निराला बघेले ने कराया पंचायत ने नहीं। क्या मुंजारे बघेले को बचा लेंगी?
यह मामला सिर्फ बालाघाट-लालबर्रा तक सीमित नहीं है। यह मध्य प्रदेश की राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक मिसाल है, जहां विधायक के निजी सहायक PA पंचायतों पर राज करते हैं और सरकारी योजनाओं को अपनी जागीर समझते हैं। प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना का उद्देश्य ग्रामीण विकास है, लेकिन यहां तो यह लूट का माध्यम बन गई है। ग्राम पंचायतों में निराला बघेले का प्रभाव इतना है कि जनपद कार्यालयों में उनकी सहमति के बिना फाइलें नहीं चलतीं। यह लोकतंत्र का मजाक नहीं तो क्या है? सरपंचों को धमकाना, ठेकेदारी हथियाना यह सब सत्ता की आड़ में चल रहा है।
क्षेत्र की जनता अब सवाल उठा रही है। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया विधायक जी ईमानदार हैं, लेकिन PA साहब तो राजा हैं। सड़कें बनती हैं, लेकिन टूट जाती हैं। पैसा कहां जाता है? दूसरी ओर विपक्षी नेता इस मामले को विधानसभा में उठाने की तैयारी में हैं? क्या कलेक्टर जांच करेंगे या मामला दब जाएगा? मुंजारे की चुप्पी से लगता है कि वे अपने निजी सहायक PA को बचाने की जुगत में हैं। अगर जांच हुई और बघेले दोषी पाए गए तो क्या मुंजारे इस्तीफा देंगी? या फिर यह सब राजनीतिक खेल है?
नायक दर्पण इस मामले की तह तक जाएगा। हमारी टीम ने कई सरपंचों से बात की जिन्होंने बघेले की करतूतों का खुलासा किया। एक सरपंच ने कहा PA साहब कहते हैं, काम मैं कराऊंगा, पैसा मैं संभालूंगा। पंचायत सिर्फ नाम की है। यह सिस्टम की विफलता है, जहां चुने हुए प्रतिनिधि डर के साए में काम करते हैं। विधायक मुंजारे को अब जवाब देना होगा क्यों PA को नहीं हटाया? क्यों सरपंच के पत्र पर चुप्पी? अगर वे ईमानदार हैं, तो तुरंत कार्रवाई करें। वरना जनता समझ जाएगी कि सारा खेल ऊपर से चल रहा है।
यह घोटाला न सिर्फ बालाघाट की राजनीति को हिला रहा है, बल्कि पूरे प्रदेश में सत्ता के दुरुपयोग की मिसाल बन रहा है। करोड़ों की योजनाएं, घटिया निर्माण, धमकियां क्या यही है विकास का मॉडल? जनता का भरोसा टूट रहा है, और अगर जांच नहीं हुई तो यह भरोसा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। मुंजारे जी, अब बोलिए निराला बघेले आपका निजी सहायक PA है या ठेकेदार? क्षेत्र की जनता इंतजार कर रही है।
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