मद बदला, राशि अधिक, माल घटिया! किरनापुर–लांजी की ग्राम पंचायतों में नियम रौंदकर आर.ओ. खरीदी, बड़े घोटाले के संकेत।

07 Feb, 2026 632 व्यूज
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नायक दर्पण/बालाघाट।
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जनपद पंचायत किरनापुर एवं लांजी अंतर्गत आने वाली कई ग्राम पंचायतों में सरपंच और सचिवों ने शासकीय नियमों को खुलेआम ताक पर रखकर गंभीर वित्तीय अनियमितता को अंजाम दिया है। आरोप है कि पंचायतों में जिन मदों के लिए राशि स्वीकृत की गई थी, उन्हें अवैध रूप से परिवर्तित कर आर.ओ. मशीनों की खरीदी की गई। जबकि संबंधित मद से इस प्रकार की खरीदी करना स्पष्ट रूप से नियम विरुद्ध है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार न तो इस मद परिवर्तन के लिए किसी सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई और न ही वित्तीय नियमों एवं पंचायत राज अधिनियम का पालन किया गया। यह पूरा कृत्य शासकीय धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है, जिससे यह साफ प्रतीत होता है कि सरपंच एवं सचिवों की मिलीभगत से शासन की राशि को मनमाने ढंग से खर्च किया गया।

नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर किया गया मद परिवर्तन
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पंचायतों को शासन द्वारा विभिन्न विकास कार्यों के लिए अलग-अलग मदों में राशि आवंटित की जाती है। प्रत्येक मद का उपयोग तय दिशा-निर्देशों के अनुसार ही किया जाना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद किरनापुर और लांजी क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में दूसरी स्वीकृत मदों की राशि को अवैध रूप से परिवर्तित कर आर.ओ. मशीन खरीदी गई। जानकारों का कहना है कि यह प्रक्रिया बिना प्रस्ताव, बिना तकनीकी स्वीकृति और बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के की गई जो सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन है।

कीमत ज्यादा, क्वालिटी घटिया!
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सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन आर.ओ. मशीनों की खरीदी की गई है, उनकी गुणवत्ता बेहद निम्न स्तर की बताई जा रही है। सूत्र बताते हैं कि जिस राशि का भुगतान दर्शाया गया है, उस राशि के अनुरूप मशीनें नहीं हैं। बाजार मूल्य की तुलना में कहीं अधिक दरों पर घटिया क्वालिटी की आर.ओ. मशीनें खरीदकर पंचायत निधि को चूना लगाया गया है। इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि इस पूरे मामले में कमीशनखोरी और बंदरबांट की भी भूमिका हो सकती है।

ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग तेज
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ग्राम पंचायतों में इस अनियमितता की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों कि माने तो एक ओर पंचायतों में मूलभूत सुविधाओं के लिए बजट का रोना रोया जाता है, वहीं दूसरी ओर शासन की राशि का इस तरह खुला दुरुपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी सरपंच एवं सचिवों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पंचायत राज अधिनियम की खुली अवहेलना
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पंचायत राज अधिनियम एवं वित्तीय नियमों के अनुसार किसी भी प्रकार का मद परिवर्तन केवल सक्षम अधिकारी की पूर्व स्वीकृति से ही किया जा सकता है। इसके अलावा खरीदी की प्रक्रिया में गुणवत्ता, दर और आवश्यकता का विशेष ध्यान रखा जाना अनिवार्य है। लेकिन इस मामले में इन सभी नियमों को दरकिनार कर दिया गया। जो प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है।

जांच नहीं हुई तो और गहराएगा घोटाला
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यदि समय रहते इस मामले की गंभीरता से जांच नहीं की गई तो यह घोटाला और भी बड़ा रूप ले सकता है। सूत्रों का यह भी कहना है कि आर.ओ. मशीन खरीदी के अलावा अन्य निर्माण सामग्री एवं विकास कार्यों में भी इसी तरह की अनियमितताएं की गई हैं, जिनका खुलासा जल्द होने वाला है।

दोषियों से वसूली और निलंबन की मांग
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इस पूरे प्रकरण में मांग उठ रही है कि मद परिवर्तन कर की गई खरीदी की जांच कराई जाए वास्तविक मूल्य और गुणवत्ता का आकलन किया जाए तथा जितनी राशि का दुरुपयोग हुआ है, उसकी वसूली संबंधित सरपंच एवं सचिवों से की जाए। साथ ही दोष सिद्ध होने पर उन्हें तत्काल निलंबित कर उनके विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी शासन की राशि के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।

अगले अंक में और बड़ा खुलासा
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नायक दर्पण के पास उपलब्ध ग्राम पंचायतो के नाम, दस्तावेज और सूत्र यह संकेत दे रहे हैं कि पंचायतों में केवल आर.ओ. मशीन ही नहीं बल्कि अन्य निर्माण सामग्री खरीदी और विकास कार्यों में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गई हैं। अगले अंक में नायक दर्पण इस भ्रष्टाचार की परत-दर-परत पोल खोलते हुए एक और बड़ा खुलासा करेगा।