नायक दर्पण की खबर का असर: सिद्धांतों पर खरी उतरीं विधायक अनुभा मुंजारे, निजी सहायक को हटाकर दिया सख्त संदेश।
08 Feb, 2026
2,862 व्यूज
नायक दर्पण/बालाघाट।
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जब जनहित और जवाबदेही बन जाता है, तब उसका असर भी उतना ही निर्णायक दिखाई देता है। नायक दर्पण द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित खबर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सच सामने लाने की ताकत में ही लोकतंत्र की मजबूती छिपी है।बालाघाट–लालबर्रा विधानसभा क्षेत्र में सत्ता की छाया में पनप रही ठेकेदारी की काली करतूतों को उजागर करने वाली इस खबर के बाद बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक कदम सामने आया है। नायक दर्पण ने अपनी खबर में विधायक अनुभा मुंजारे के निजी सहायक (पीए) निराला सिंह बघेले पर लगे गंभीर आरोपों को तथ्यों के साथ सामने रखा था। आरोप थे कि सरकारी निर्माण कार्यों में सीधे हस्तक्षेप किया जा रहा है, स्वीकृति दिलाने के नाम पर दबाव बनाया जा रहा है और स्वयं ठेकेदार बनकर करोड़ों रुपये की योजनाओं में गड़बड़ी की जा रही है। खबर में यह भी सामने आया था कि एक सरपंच द्वारा लिखित शिकायत पत्र और ऑडियो साक्ष्य जिनमें पूरे घटनाक्रम की पुष्टि होती है। इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई थी। आम जनता में यह सवाल गूंजने लगा था कि क्या सत्ता के करीब होने का मतलब कानून और नैतिकता से ऊपर होना है? लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में जो सबसे अहम और सराहनीय पहलू सामने आया वह विधायक अनुभा मुंजारे का त्वरित और स्पष्ट रुख रहा।
विधायक अनुभा मुंजारे ने बिना किसी दबाव, पक्षपात या व्यक्तिगत रिश्तों को आड़े आने दिए तत्काल प्रभाव से अपने निजी सहायक निराला सिंह बघेले को विधायक कार्यालय के सभी शासकीय एवं कार्यालयीन कार्यों से मुक्त कर दिया। इसका विधिवत पत्र भी जारी किया गया जिसकी प्रतिलिपि कलेक्टर बालाघाट एवं जिला जनसंपर्क अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई। यह कदम न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक नैतिकता की दृष्टि से भी एक मजबूत संदेश देता है।
राजनीति में अक्सर यह देखा जाता है कि करीबी लोगों पर लगे आरोपों को दबाने या अनदेखा करने की कोशिश की जाती है, लेकिन विधायक अनुभा मुंजारे ने इसके ठीक उलट उदाहरण पेश किया। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि उनके लिए सिद्धांत, पारदर्शिता और जनहित सर्वोपरि है। चाहे व्यक्ति कितना भी करीबी क्यों न हो अगर उस पर भ्रष्टाचार या अनियमितता के गंभीर आरोप हैं, तो उस पर कार्रवाई निश्चित है। क्षेत्रीय जनता और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन यही फैसले किसी जनप्रतिनिधि की असली पहचान बनाते हैं। विधायक अनुभा मुंजारे ने यह साबित कर दिया कि वे केवल भाषणों में ही नहीं बल्कि व्यवहार में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं। उनका यह कदम उन तमाम जनप्रतिनिधियों के लिए एक उदाहरण है, जो अक्सर नैतिक साहस दिखाने से बचते हैं।
नायक दर्पण की खबर के बाद हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर स्वतंत्र पत्रकारिता की भूमिका को रेखांकित किया है। अगर मीडिया ईमानदारी से सवाल न उठाए, तो कई मामले फाइलों में दबे रह जाते हैं। इस प्रकरण में मीडिया, प्रशासन और जनप्रतिनिधि तीनों की भूमिका सामने आई, जिसने लोकतंत्र को मजबूत किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विधायक अनुभा मुंजारे का यह कदम क्षेत्र में भरोसा बढ़ाने वाला है। जनता को यह संदेश गया है कि उनकी आवाज़ सुनी जा रही है और गलत करने वालों को संरक्षण नहीं मिलेगा। कई सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने भी इस फैसले की सराहना करते हुए कहा है कि यही जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा होती है। कुल मिलाकर यह पूरा घटनाक्रम न सिर्फ एक खबर का असर है, बल्कि उस राजनीतिक संस्कृति की झलक भी है, जिसमें जवाबदेही और नैतिकता को महत्व दिया जाता है। नायक दर्पण द्वारा उठाई गई आवाज़ और विधायक अनुभा मुंजारे द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे साफ हों, तो व्यवस्था में सुधार संभव है। यह मामला आने वाले समय में एक नजीर के रूप में याद किया जाएगा जहां पत्रकारिता ने अपना धर्म निभाया और जनप्रतिनिधि ने सिद्धांतों पर चलते हुए बिना किसी समझौते के कार्रवाई की।
शेयर करें
लिंक कॉपी हो गया!