सात साल, तीन चुनाव और एक भी ईंट नहीं। भीकेवाड़ा का सामुदायिक भवन या मधु भगत की सबसे बड़ी नाकामी?

09 Feb, 2026 136 व्यूज
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नायक दर्पण/बालाघाट।
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सात साल बीत चुके हैं अब आठवां साल भी शुरू हो चुका है, लेकिन भीकेवाड़ा का सामुदायिक भवन आज भी वही पुरानी कहानी दोहरा रहा है सिर्फ प्लेटों पर नाम फाइलों में धूल और ग्रामीणों के दिलों में गहराता आक्रोश। 2018 का वह धूमधाम वाला भूमिपूजन आज भी गांव वालों को चुभता है, क्योंकि उस दिन जो सपना दिखाया गया था, वह सपना अब हकीकत बनने की बजाय राजनीतिक नाटक का हिस्सा बन गया है।
विधायक मधु भगत जी अब तो आप दोबारा सत्ता में हैं, फिर भी क्यों यह भवन आपकी प्राथमिकता में सबसे नीचे पड़ा हुआ है? क्या सत्ता पाने के बाद भी ग्रामीणों की बुनियादी जरूरतें आपके लिए सिर्फ चुनावी जुमले ही रह गई हैं? पहले 2018 में भूमिपूजन कर वोट बटोरे, फिर हार के बाद चुप्पी साध ली, अब 2023-24 के चुनाव में फिर वादे करके जीत हासिल की लेकिन निर्माण? जीरो! यह क्या मजाक चल रहा है ग्रामीणों के साथ?
ग्रामीणों ने नाम ना छापने के शर्त में कहे रहे है कि विधायक साहब चुनाव के समय गांव-गांव घूमकर वोट मांगते हैं, हाथ जोड़ते हैं, आंसू बहाते हैं, लेकिन जीत के बाद गांव की तरफ मुंह भी नहीं करते। दो साल से ज्यादा हो गए न कोई मीटिंग, न कोई निरीक्षण, न बजट की कोई खबर। सिर्फ वही पुराने जुमले जल्द शुरू होगा, फंड स्वीकृत हो रहा है, प्राथमिकता में है। कितने जुमले और कितने साल तक सुनते रहेंगे भीकेवाड़ा के लोग?
यह लापरवाही अब साफ तौर पर जनता के साथ धोखा है। सामुदायिक भवन कोई महल नहीं बल्कि गांव की जीवनरेखा है। बरसात में तिरपाल के नीचे शादी, गर्मी में खुले में ग्राम सभा, महिलाओं की बैठकें आंगन में यह सब देखकर विधायक का दिल नहीं पिघलता? क्या आपकी कार्यशैली में ग्रामीण विकास का मतलब सिर्फ फोटो खिंचवाना और शिलान्यास पट्टिका लगवाना रह गया है? तीन बार इस एक भवन से राजनीतिक फायदा उठाया जा चुका है। पहला भूमिपूजन, दूसरा सत्ता परिवर्तन का बहाना, तीसरा दोबारा चुनाव जीतने का हथियार। अब चौथी बार क्या इंतजार है? क्या अगले चुनाव तक इंतजार करेंगे ग्रामीण?राजनीतिक जानकार साफ कह रहे हैं यदि विधायक मधु भगत में थोड़ी सी भी ईमानदारी और इच्छाशक्ति होती तो यह काम महीनों में पूरा हो जाता। लेकिन यहां सात-आठ साल से फाइलें सड़ रही हैं। यह उपेक्षा नहीं बल्कि जानबूझकर की गई अनदेखी है। ग्रामीणों का गुस्सा अब उबल रहा है। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा सब एकजुट होकर कह रहे हैं कि यदि जल्द निर्माण शुरू नहीं हुआ तो जनपद, जिला और राज्य स्तर पर आंदोलन होगा। क्या विधायक साहब इंतजार करेंगे कि आंदोलन की आग लगे तब जाकर याद आएगा भीकेवाड़ा?
सवाल सीधा है मधु भगत जी से आप विधायक हैं या सिर्फ चुनावी कलाकार? विकास के नाम पर सिर्फ कागजी खेल खेलेंगे या कभी जमीन पर कुछ दिखाएंगे? यदि सच्चे जनप्रतिनिधि हैं तो तुरंत निर्माण शुरू कराइए समयबद्ध योजना सार्वजनिक कीजिए, ग्रामीणों से मिलिए और जवाब दीजिए। वरना यह अधूरा भवन आपकी राजनीतिक कब्र बन जाएगा एक ऐसा स्मारक जो हर दिन चिल्लाएगा कि वादे बड़े थे, लेकिन अमल शून्य रहा। भीकेवाड़ा नहीं मानेगा अब जुमलों को समय आ गया है जवाबदेही का यदि नहीं तो जनता खुद फैसला करेगी कि ऐसे जनप्रतिनिधि की जरूरत है या नहीं। विकास की बातें बंद करो, विकास दिखाओ या फिर चुपचाप स्वीकार कर लो कि भीकेवाड़ा का सामुदायिक भवन आपकी सबसे बड़ी नाकामी और सबसे काला धब्बा बन चुका है।