मातृ-पितृ पूजन दिवस पर भावनाओं से सराबोर हुआ विद्यालय परिसर। महात्मा ज्योतिबा फुले मिडिल स्कूल सरेखा, बालाघाट में भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन।
14 Feb, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
14 फरवरी को जहां एक ओर आधुनिक परिवेश में प्रेम दिवस मनाने की परंपरा प्रचलित है, वहीं सरेखा स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले मिडिल स्कूल सरेखा में भारतीय संस्कृति और जीवन शैली पर आधारित मातृ-पितृ पूजन दिवस अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में समस्त छात्र-छात्राओं उनके अभिभावकों तथा विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति में इसे एक पारिवारिक उत्सव का रूप दे दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के प्रधानपाठक राजेश कुमार पाण्डेय द्वारा विद्या एवं वाणी की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ प्रारंभ हुए इस आयोजन में भारतीय संस्कृति की छटा स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई। कार्यक्रम का संचालन वेद वेदांत सेवा समिति के प्रमुख श्री शेखर जी के सहयोग से किया गया। विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने मातृ-पितृ पूजन के महत्व को अपने विचारों, प्रेरक उद्बोधनों एवं भावपूर्ण गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि माता-पिता जीवन के प्रथम गुरु, सच्चे मार्गदर्शक और हमारे भविष्य के निर्माता होते हैं। उनका स्थान जीवन में सर्वोपरि है। उनके प्रति सम्मान, कृतज्ञता और आजीवन आदर ही सच्चे संस्कारों की पहचान है। कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब बच्चों ने अपने माता-पिता के चरणों में शीश नवाकर उनके माथे पर तिलक लगाया और आशीर्वाद प्राप्त किया। बच्चों ने पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया तथा आरती उतारकर अपने माता-पिता के प्रति श्रद्धा प्रकट की। तत्पश्चात परिक्रमा कर उनका मुंह मीठा कराया। इस दृश्य को देखकर उपस्थित अभिभावकों की आंखें नम हो गईं और पूरा परिसर भावनाओं से ओतप्रोत हो उठा। इस अवसर पर प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की मातृ-पितृ भक्ति का स्मरण करते हुए बच्चों को यह संदेश दिया गया कि सच्ची सफलता और समृद्धि का मार्ग माता-पिता के आशीर्वाद से ही प्रशस्त होता है।कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय संस्कृति में माता-पिता का सम्मान केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों का आधार है। कार्यक्रम में वार्ड पार्षद श्रीमती लोहीना पंचेश्वर एवं श्रीमती दुर्गा लिल्हारे विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में बच्चों को जीवन में माता-पिता, गुरुजनों एवं बड़ों के महत्व को समझाते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जिस समाज में परिवार और संस्कार मजबूत होते हैं, वही समाज प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है। समापन अवसर पर संस्था के संचालक श्री सनतराम पांचे ने बच्चों को इस संस्कार को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में भारतीय परंपराओं को जीवित रखना अत्यंत आवश्यक है, और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
अंत में प्रधानपाठक श्री राजेश कुमार पाण्डेय ने समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं, अभिभावकों एवं वेद वेदांत सेवा समिति के प्रति आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी इसी प्रकार के सहयोग की अपेक्षा जताई। कार्यक्रम के उपरांत बच्चों को फल एवं चॉकलेट वितरित कर आयोजन का समापन किया गया। मातृ-पितृ पूजन दिवस का यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन में संस्कार, कृतज्ञता और पारिवारिक मूल्यों की मजबूत नींव रखने का प्रेरणादायक प्रयास भी साबित हुआ।
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