सचिव पर लाखों की निकासी का आरोप: नियम विरुद्ध राशि आहरण का मामला गरमाया। पंचायती राज अधिनियम की सचिव ने उड़ाई धज्जियां। आहरण पर उठे गंभीर सवाल, पारदर्शिता पर फिर लगा दाग
15 Feb, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
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जनपद पंचायत किरनापुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत रजेगांव में पदस्थ सचिव चमन लाल सोनवाने ने पंचायती राज नियमों को ताक पर रखकर जनता के पैसे से खेल खेला है। लाखों रुपये की सरकारी राशि को बिल बनाकर सीधे अपने निजी बैंक खाते में आहरण कर लिया। जबकि मध्य प्रदेश पंचायती राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 तथा मध्य प्रदेश ग्राम पंचायत (लेखा) नियम 1999 के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार सचिव अपने खाते में कोई राशि नहीं निकाल सकते। यह घोटाला न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि ग्रामीण विकास की नींव पर चोट है। ग्रामवासियों में आक्रोश व्याप्त है और अब इसकी जांच तथा पूर्ण वसूली की मांग जोरों पर है।
नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाईं
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पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम पंचायत की राशि ग्राम कोष में जमा होती है। इसकी निकासी संयुक्त हस्ताक्षर से होती है सरपंच और सचिव दोनों के कोई भी आहरण बिना ग्राम पंचायत की बैठक में पारित प्रस्ताव के नहीं हो सकता। लेकिन चमन लाल सोनवाने ने इन सभी बाध्यों को धता बताते हुए एक के बाद एक बिल तैयार कर राशि अपने खाते में डाल दी। जानकारी के मुताबिक यह आहरण विभिन्न तिथियों पर किया गया जो पूर्णतः गैर-कानूनी है।
घोटाले की विस्तृत फेहरिस्त
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यह है वह काला चिट्ठा जो सचिव चमन लाल सोनवाने के नियम-विरुद्ध आहरण को उजागर करता है
बिल क्रमांक 12, दिनांक 04/05/2024 — 17,000 रुपये, बिल क्रमांक 43, दिनांक 18/01/2024 — 15,000 रुपये, बिल क्रमांक 21, दिनांक 07/06/2024 — 20,000 रुपये बिल क्रमांक 11, दिनांक 10/02/2024 — 25,000 रुपये, बिल क्रमांक 18, दिनांक 27/11/2023 — 10,000 रुपये, बिल क्रमांक 11, दिनांक 15/11/2023 — 10,000 रुपये बिल क्रमांक 12, दिनांक 30/07/2023 — 10,000 रुपये, बिल क्रमांक 04, दिनांक 08/07/2023 — 15,000 रुपये, बिल क्रमांक 02, दिनांक 14/06/2023 — 10,000 रुपये कुल राशि: 1,32,000 रुपये ये रकमें विकास कार्यों, योजनाओं या हितग्राहियों के भुगतान के नाम पर निकाली गईं, लेकिन सचिव के खाते में चली गईं। क्या ये पैसे विकास में लगे? या सचिव के निजी इस्तेमाल में? सवालों की बाढ़ आ गई है।
पंचायती राज नियमों का घोर उल्लंघन
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मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 72 के तहत सचिव ग्राम पंचायत का कार्यकारी अधिकारी है, लेकिन उसकी शक्तियां सीमित हैं। मध्य प्रदेश ग्राम पंचायत (लेखा) नियम 1999 के नियम 21 में साफ लिखा है बैंक या पोस्ट ऑफिस बचत खाते से राशि निकासी बिना ग्राम पंचायत की बैठक में पारित प्रस्ताव के नहीं हो सकती। निकासी सचिव और सरपंच के संयुक्त हस्ताक्षर से होगी। लेकिन यहां सचिव ने अकेले बिल काटकर राशि अपने खाते में डाल दी। यह न केवल वित्तीय अनियमितता है, बल्कि भ्रष्टाचार का स्पष्ट मामला है। पिछले वर्षों में भी बालाघाट सहित पूरे मध्य प्रदेश में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां सचिवों और सरपंचों ने सरकारी धन का दुरुपयोग किया। कई ग्राम पंचायत सचिव को इस दुरुपयोग के लिए निलंबित किया गया था। लेकिन रजेगांव का मामला इनसे भी अधिक चौंकाने वाला है, क्योंकि यहां एक-एक कर नौ बिलों से राशि निकाली गई जिसमें कोई छुपाव नहीं बल्कि खुल्लमखुल्ला लूट है। जहाँ रजेगांव के ग्रामीण इस घोटाले से खासे आक्रोशित हैं। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया हमारे गांव में सड़क, नाली, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। मनरेगा, PMAY, स्वच्छ भारत जैसी योजनाओं के पैसे कहां गए? सचिव साहब ने तो सब अपने खाते में भर लिया। अब जांच होनी चाहिए वरना हम सड़क पर उतर आएंगे। सरपंच की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या वे इस आहरण से अनभिज्ञ थे? या मिलीभगत थी? ग्राम सभा की बैठकें कब हुईं? प्रस्ताव कहां पास हुए? इन सारे सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिले।
प्रशासन पर दबाव, कार्रवाई की मांग
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नायक दर्पण टीम ने इस मामले को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया है। टीम ने मांग की है कि पंचायती राज नियमों के अनुसार तुरंत जांच समिति गठित की जाए, सचिव चमन लाल सोनवाने को निलंबित किया जाए और पूरी राशि उनकी संपत्ति से वसूल की जाए। साथ ही मध्य प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 89 के तहत उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए। जनपद पंचायत किरनापुर के सीईओ को इसकी जानकारी दी गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है। अगर देरी हुई तो यह सिर्फ एक सचिव का घोटाला नहीं, बल्कि पूरे पंचायती राज तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल होगा।
पंचायतों में बढ़ता भ्रष्टाचार एक बड़ा खतरा
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मध्य प्रदेश में पंचायतें ग्रामीण विकास की रीढ़ हैं। केंद्र और राज्य सरकार करोड़ों रुपये मनरेगा, 15वें वित्त आयोग, समग्र समृद्धि योजना आदि के तहत भेजती हैं। लेकिन अगर सचिव जैसे अधिकारी ही पैसे लूटने लगें तो विकास कहां से होगा?
समय आ गया है जवाबदेही तय करने का
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रजेगांव का यह मामला सिर्फ 1.32 लाख रुपये का नहीं है। यह उन हजारों पंचायतों का प्रतिनिधित्व करता है, जहां जनता के पैसे से खिलवाड़ हो रहा है। चमन लाल सोनवाने जैसे अधिकारियों को सबक मिलना चाहिए कि नियम सबके लिए हैं, चाहे वे सचिव हों या सरपंच अब प्रशासन की बारी है। अगर वे इस घोटाले को दबाने की कोशिश करेंगे, तो जनता का गुस्सा और भड़केगा। जांच हो, वसूली हो, दोषी पर सजा हो यही पंचायती राज की सच्ची भावना है। वरना, गांव-गांव में नारे लगेंगे, सचिव घोटालेबाज, प्रशासन चुपचाप!
इनका कहना है
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जब नायक दर्पण कि टीम ने दूरभाष पर किरनापुर मुख्य कार्यपालन अधिकारी से बात कि तो उन्होंने कहा सचिव अपने खाते में कोई भी राशि नहीं निकाल सकते हैं आपके माध्यम से संज्ञान में लाया गया है जांच कर जो भी पाया जाएगा दोषी पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
रामगोपाल यादव
मुख्य कार्यपालन अधिकारी
जनपद पंचायत किरनापुर
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