मध्य प्रदेश विधानसभा में गूंजा पंचायत सचिवों के संलग्नीकरण का मामला, बालाघाट के सीईओ पर भ्रामक जानकारी देने का आरोप।
19 Feb, 2026
20 व्यूज
बालाघाट।
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बालाघाट जिले के ग्राम पंचायत सचिवों के संलग्नीकरण का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। सदन में इस विषय को रखते हुए जनप्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत बालाघाट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा सचिवों के संलग्नीकरण के संबंध में असत्य एवं भ्रामक जानकारी सदन के पटल पर प्रस्तुत की गई, जिससे माननीय सदन को गुमराह करने का प्रयास हुआ है।
सदन में रखे गए तथ्यों के अनुसार बालाघाट जिले के अंतर्गत आने वाले 10 जनपद पंचायतों में ग्राम पंचायत सचिवों को उनकी मूल पदस्थापना से हटाकर जनपद कार्यालयों में कार्य करने हेतु आदेशित किया गया है। जबकि राज्य शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि पंचायत सचिवों का संलग्नीकरण बिना सक्षम अनुमति एवं नियमानुसार प्रक्रिया के नहीं किया जा सकता। ऐसे में जनप्रतिनिधि ने इसे शासन के आदेशों का खुला उल्लंघन बताया।
विधानसभा में कहा गया कि जब इस विषय पर प्रश्न लगाया गया तो जिला पंचायत बालाघाट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जो जानकारी शासन को भेजी गई, वह वास्तविक स्थिति से भिन्न थी। सदन में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि सचिवों को व्यापक स्तर पर मूल पदस्थापना से हटाकर अन्यत्र कार्य में लगाया गया है, तो यह न केवल पंचायत व्यवस्था को प्रभावित करता है, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी प्रतिकूल असर डालता है।
जनप्रतिनिधि ने सदन को अवगत कराया कि पंचायत सचिव ग्रामीण स्तर पर शासन की विभिन्न योजनाओं—जैसे मनरेगा, स्वच्छता अभियान, आवास योजना एवं अन्य विकास कार्यों—के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनका जनपद कार्यालयों में संलग्नीकरण ग्राम पंचायतों के नियमित कार्यों को बाधित करता है और आम जनता को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
सदन में यह भी मांग रखी गई कि जिन अधिकारियों द्वारा भ्रामक अथवा असत्य जानकारी प्रेषित की गई है, उनके विरुद्ध सख्त एवं कठोर कार्रवाई की जाए। जनप्रतिनिधि ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री से आग्रह किया कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी जनप्रतिनिधि के प्रश्न का उत्तर तथ्यात्मक एवं प्रमाणिक रूप से ही सदन में प्रस्तुत हो।
विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष यह विषय रखते हुए कहा गया कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। यदि सदन को ही गलत जानकारी दी जाएगी तो शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा होगा।
मामले के उठने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। अब देखना यह होगा कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग इस गंभीर आरोप पर क्या रुख अपनाता है और जिला पंचायत बालाघाट के अधिकारियों पर किसी प्रकार की कार्रवाई होती है या नहीं।
बालाघाट जिले के पंचायत सचिवों के संलग्नीकरण का यह मुद्दा अब विधानसभा स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे आने वाले दिनों में प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ने की संभावना है।
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