सरेखा रेलवे ब्रिज निर्माण में भारी भ्रष्टाचार का आरोप, ठेकेदार व अधिकारियों पर एफआईआर की मांग।

22 Feb, 2026 546 व्यूज
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नायक दर्पण/बालाघाट।
शहर के सरेखा क्षेत्र में बने रेलवे ब्रिज और उससे जुड़ी सीमेंट कांक्रीट सड़क के निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्राम कोसमी निवासी पूर्व सरपंच ओमकार माहुले ने इस मामले में देश के रेल मंत्री से लेकर जिला प्रशासन तक लिखित शिकायत भेजकर उच्चस्तरीय जांच और आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।
शिकायत में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे, कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक बालाघाट, डीआरएम दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे नागपुर, लोक निर्माण विभाग संभाग-1 बालाघाट तथा मध्यप्रदेश राज्य सड़क विकास निगम (MPRDC) छिंदवाड़ा को भी संबोधित किया गया है।

पुल की लंबाई जानबूझकर कम करने का आरोप
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आवेदक पूर्व सरपंच ओमकार माहुले का आरोप है कि वर्ष 2023-24 एवं 2025 में बने सरेखा रेलवे ब्रिज के निर्माण में गंभीर अनियमितताएं की गईं। शिकायत के अनुसार पुल की कोसमी दिशा की निर्धारित लंबाई को सर्वे के विपरीत जानबूझकर कम कर दिया गया। आरोप है कि ऐसा कुछ निजी व्यक्तियों की जमीन को लाभ पहुंचाने और उसकी बाजार कीमत बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रारंभिक सर्वे में पुल की लंबाई अधिक निर्धारित थी, लेकिन अंतिम निर्माण में उसे घटा दिया गया। इससे न केवल शासकीय धन का दुरुपयोग हुआ, बल्कि भविष्य में यातायात और सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा सकता है। आवेदक ने निर्माण को गुणवत्ताहीन और कमजोर बताते हुए तकनीकी जांच की मांग की है।

पेटी ठेके पर दिया गया कार्य, घटिया सामग्री का इस्तेमाल
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शिकायत में यह भी कहा गया है कि पुल के दोनों ओर बनने वाली सीमेंट कांक्रीट सड़क का ठेका कथित रूप से कमीशन के आधार पर किसी अन्य अनुभवहीन व्यक्ति को पेटी पर दे दिया गया। आरोप है कि इस पेटी ठेकेदार ने घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग कर कमजोर सड़क का निर्माण किया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि पुल में आई तकनीकी खामियों और कमजोर निर्माण को छिपाने के लिए 11 और 12 फरवरी 2026 को जल्दबाजी में डामर बिछाकर भ्रष्टाचार पर कालीन डालने की कोशिश की गई। शिकायतकर्ता ने इसे सुनियोजित साजिश बताया है।

बिना स्वीकृति 100 मीटर सीसी रोड निर्माण
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शिकायत में यह भी उल्लेख है कि कोसमी रेलवे पुल से पारस पोहा मिल तक लगभग 100 मीटर सीमेंट कांक्रीट सड़क का निर्माण बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के कर दिया गया। आरोप है कि संबंधित व्यक्तियों के पास न तो लोक निर्माण विभाग की अनुमति है और न ही एमपीआरडीसी की स्वीकृति। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह न केवल नियमों की खुली अवहेलना है बल्कि शासकीय भूमि पर मनमानी का उदाहरण भी है।

अस्पताल निर्माण की तैयारी, जमीन मूल्य बढ़ाने की आशंका
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आवेदक ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित खसरा नंबर की लगभग एक एकड़ भूमि पर निजी अस्पताल निर्माण की तैयारी की जा रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पुल और सड़क निर्माण में हेरफेर कर पहले जमीन की उपयोगिता और कीमत बढ़ाई गई, और अब व्यावसायिक लाभ के लिए उसका उपयोग किया जा रहा है।

ठेकेदार पर सीधा आरोप
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शिकायत में कहा गया है कि निर्माण कार्य “प्रांजल कंस्ट्रक्शन” नाम से किया गया, जिसके संचालक के रूप में एक व्यक्ति का नाम सामने आया है। आवेदक ने आरोप लगाया है कि संबंधित ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से पूरा खेल रचा गया।

एफआईआर, लाइसेंस निरस्तीकरण और उच्चस्तरीय जांच की मांग
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पूर्व सरपंच ओमकार माहुले ने मांग की है कि स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की टीम गठित कर पुल और सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। साथ ही दोषी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार का लाइसेंस निरस्त कर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। इस मामले ने शहर में चर्चा का विषय बना दिया है। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह बालाघाट के बुनियादी ढांचे के नाम पर बड़े घोटाले का संकेत हो सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।