जेसीबी से हुए निर्माण कार्य की शिकायत पर जांच, क्या निष्पक्ष होगी जांच या फिर लीपापोती? मामला किरनापुर जनपद के ग्राम पंचायत मड़कापार का
22 Feb, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
किरनापुर जनपद अंतर्गत की ग्राम पंचायत मड़कापार में जेसीबी मशीन से कराए गए निर्माण कार्य को लेकर दर्ज की गई शिकायत अब जांच के दायरे में आ गई है। शिकायत के आधार पर संबंधित अधिकारियों ने जांच की तारीख तय कर दी है। शिकायतकर्ता द्वारा ग्राम पंचायत मड़कापार में सुदूर सड़क निर्माण कार्य में मशीनों के उपयोग को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि निर्माण कार्य में नियमों की अनदेखी कर जेसीबी एवं अन्य मशीनों का प्रयोग किया गया, जबकि ऐसे कार्यों में श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराना प्राथमिक उद्देश्य होता है।
जारी पत्र के अनुसार 24 फरवरी 2026 को दोपहर 1 बजे ग्राम पंचायत मड़कापार में उक्त शिकायत की जांच की जाएगी। जांच अधिकारी, जनपद पंचायत किरनापुर द्वारा शिकायतकर्ताओं को संबंधित दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सरपंच, सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायक को भी आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले निर्माण कार्यों में यदि मनरेगा या अन्य श्रमप्रधान योजनाओं की राशि का उपयोग किया जाता है, तो मशीनों के उपयोग पर स्पष्ट प्रतिबंध होता है। ऐसे में यदि जेसीबी से कार्य कराया गया है, तो यह नियमों के विरुद्ध माना जाएगा। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जेसीबी मशीनों से काम कराकर न केवल शासन की गाइडलाइन का उल्लंघन किया गया, बल्कि स्थानीय मजदूरों के रोजगार के अवसर भी छीन लिए गए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होगी या फिर पहले की तरह मामले को दबाने का प्रयास किया जाएगा? ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि पूर्व में भी कई मामलों में जांच की घोषणा तो हुई, लेकिन अंतिम परिणाम सार्वजनिक नहीं किए गए। ऐसे में इस बार लोगों की निगाहें जांच अधिकारी की कार्यशैली पर टिकी हुई हैं।
पत्र की प्रतिलिपि मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत किरनापुर को भी भेजी गई है, जिससे संकेत मिलता है कि मामला प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई संभव है। वहीं यदि शिकायत निराधार पाई जाती है, तो शिकायतकर्ताओं को भी स्पष्ट जवाब मिल जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि शासन द्वारा पारदर्शिता और जवाबदेही की बात की जाती है, ऐसे में जांच की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जानी चाहिए। जांच रिपोर्ट ग्राम सभा में रखी जाए और दोषियों पर ठोस कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक लग सके।
फिलहाल 24 फरवरी की जांच तिथि को लेकर गांव में हलचल तेज है। शिकायतकर्ता दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं पंचायत पक्ष भी अपने बचाव में आवश्यक कागजात जुटाने में लगा है। अब देखना यह है कि जांच में सच्चाई सामने आती है या मामला कागजी खानापूर्ति तक सीमित रह जाता है।
जनता को उम्मीद है कि प्रशासन निष्पक्षता का परिचय देगा और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह जांच पारदर्शिता की मिसाल बनेगी या फिर एक और फाइलों में दब जाने वाला मामला साबित होगी।
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