जनादेश का अपमान बर्दाश्त नहीं, मंत्री को तत्काल हटाए मुख्यमंत्री : श्याम पंजवानी

22 Feb, 2026 213 व्यूज
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नायक दर्पण/बालाघाट।
मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी को लेकर एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। कैलाश विजयवर्गीय द्वारा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के खिलाफ कथित अमर्यादित भाषा के प्रयोग को लेकर बालाघाट में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। शहर कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मंत्री का पुतला दहन कर आक्रोश जताया और सार्वजनिक माफी की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां होती हैं। नेता प्रतिपक्ष पर की गई टिप्पणी को कांग्रेस नेताओं ने सदन की गरिमा के विरुद्ध बताया।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्याम पंजवानी ने कहा कि प्रदेश की 7 करोड़ 30 लाख जनता ने स्पष्ट जनादेश देकर भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में बैठाया है और कांग्रेस को विपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का दायित्व है कि वह सदन की मर्यादा बनाए रखते हुए सरकार की नीतियों, निर्णयों और कार्यशैली पर सवाल उठाए। “हम लोकतांत्रिक परंपराओं के तहत अपनी भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन मंत्री द्वारा बौखलाहट में दिए गए अनर्गल और अमर्यादित बयान इस बात का संकेत हैं कि सरकार तथ्यात्मक जवाब देने में असफल हो रही है। यह केवल नेता प्रतिपक्ष का नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता के जनादेश का भी अपमान है।
युवक कांग्रेस अध्यक्ष शिवम विश्वकर्मा ने कहा कि प्रदेश का युवा आज महंगाई, बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहा है। ऐसे समय में सरकार को युवाओं के मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यक्तिगत टिप्पणी कर ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। “सदन की गरिमा बनाए रखना प्रत्येक जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।
सेवादल अध्यक्ष जीतू बर्वे ने अपने वक्तव्य में कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहां संयम, शालीनता और मर्यादा अपेक्षित है। यदि मंत्री स्वयं इन मूल्यों का पालन नहीं करेंगे तो समाज में गलत संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस तरह की असंसदीय भाषा का कड़ा विरोध करती है और मुख्यमंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग करती है।
महिला कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मी बगाडे ने कहा कि जनप्रतिनिधियों से संतुलित और जिम्मेदार भाषा की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और समाज के सभी वर्गों को ऐसे बयान निराश करते हैं। “हम मांग करते हैं कि मंत्री सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और भविष्य में ऐसी भाषा का प्रयोग न करें।उन्होंने कहा प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि मंत्री द्वारा माफी नहीं मांगी गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन में श्याम पंजवानी, लक्ष्मी वाघाडे, अनिल सोनी, जीतू बर्वे, शिवम विश्वकर्मा, अनिल बनोटे, उषा मिश्रा, जुवैदा अंसारी, प्रवीण मदनकर, प्रकाश मदनकर, शानू राय, राजू यादव, उर्मिला जी, शीला नागपुरे, दुर्गा वरकड़े, दीपक बघेल, सौरभ चौहान, चंद्रेश दशहरे, राहुल बीरंबार, अंकित बिसेन, मयूर उइके, सुनील बनारे, प्रवीण घरड़े, राजू राय, रघु सिंगार, जुगल किशोरी, साहिल विश्वकर्मा, चंदू उइके, राहुल बिरनावार, शाकिर बिसेन, सुमित उइके, देव उइके, सारंग विश्वकर्मा, डी. के. श्रीवास, मयूर उइके, देवेंद्र दमोह, सोनू विश्वकर्मा, डी. के. मेश्राम, मिथुन सोलखे, विकास निकोंसे, मुकेश रनगिरे, जितेंद्र पटले, राजा कोरी, बगलेश लिल्हारे, राजेंद्र मोहारे, शैलेश टेभरे, मोंटू बिसेन सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कांग्रेस नेताओं ने दोहराया कि लोकतांत्रिक परंपराओं और सदन की गरिमा की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।