जिला पंचायत CEO के खिलाफ बगावत,अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी। कर्मचारियों का सीधा एलान मांगें नहीं मानी तो 2 मार्च से हड़ताल।
27 Feb, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में इन दिनों हालात विस्फोटक हो चले हैं। विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत के कथित अत्याचारपूर्ण रवैये और मनमानी कार्यशैली के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जिला पंचायत सीईओ को तत्काल हटाया नहीं गया और उनकी 10 प्रमुख मांगों का निराकरण नहीं हुआ। तो 28 फरवरी 2026 से तीन दिन का सामूहिक अवकाश लेकर 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। मोर्चा का कहना है कि यह केवल विरोध नहीं बल्कि सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि वर्तमान जिला पंचायत सीईओ द्वारा लगातार अभद्र भाषा का प्रयोग, सार्वजनिक रूप से अपमानित करना और अमानवीय दबाव बनाना आम बात हो गई है। विशेष रूप से महिला कर्मचारियों को देर रात तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में बैठाकर खरी-खोटी सुनाना गंभीर मानसिक उत्पीड़न है।
वी.सी. के नाम पर अपमान, नियमों को ताक पर रखने का आरोप
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मोर्चा की सबसे तीखी शिकायत रोजाना शाम 6 बजे से रात 8-9 बजे तक अनावश्यक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर कर्मचारियों को अपमानित करने को लेकर है। आरोप है कि बैठक के नाम पर सार्वजनिक रूप से ताने मारे जाते हैं। जिससे कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा है। महिला कर्मचारियों को देर रात तक बैठाए रखना सेवा नियमों और गरिमा दोनों के खिलाफ बताया गया है। कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि योजनाओं की दैनिक प्रगति के नाम पर वेतन कटौती जैसी मनमानी की जा रही है। बिना ठोस कारण वेतन में कटौती कर दबाव बनाया जा रहा है। जिसे तत्काल बंद कर पूर्व में की गई कटौतियों की वापसी की मांग की गई है।
मनरेगा और आवास योजनाओं में दबाव
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मोर्चा ने कहा कि मांग आधारित योजना मनरेगा में जबरन लक्ष्य निर्धारित कर नियम विरुद्ध लेबर नियोजन के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसी तरह 2016-2022 के लंबित प्रधानमंत्री आवास प्रकरणों को लेकर फील्ड स्तर के कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। जबकि कई मामलों में हितग्राहियों की वास्तविक समस्याएं जिम्मेदार हैं। आरोप यह भी है कि सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों को फोर्स क्लोज कराने का दबाव डाला जा रहा है और जिला स्तर पर स्पेशल क्लोज की मांग की जा रही है। जिससे वास्तविक शिकायतों का निराकरण प्रभावित हो सकता है।
अवकाश और स्थानांतरण में भी हस्तक्षेप
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संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया कि आकस्मिक अवकाश की स्वीकृति संबंधित अधिकारी के बजाय सीधे जिला पंचायत सीईओ स्तर से रोकी जा रही है। इतना ही नहीं स्थानांतरण पर रोक के बावजूद कर्मचारियों को जबरन अन्यत्र भेजने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसे प्रशासनिक तानाशाही बताते हुए मोर्चा ने कहा कि भय और दंड की नीति से विभाग नहीं चल सकता।
ग्रामीण विकास योजनाएं ठप होने का खतरा
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यदि हड़ताल होती है तो जिले की समस्त ग्रामीण विकास योजनाएं मनरेगा, आवास, पंचायत कार्य, स्वच्छता और अन्य विकास कार्य पूरी तरह ठप हो सकते हैं। इससे लाखों ग्रामीणों पर सीधा असर पड़ेगा। संयुक्त मोर्चा ने साफ शब्दों में कहा है कि सम्मान से काम करेंगे अपमान सहकर नहीं
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। क्या प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालेगा या फिर टकराव बढ़कर जिले को विकास ठहराव की ओर धकेल देगा? फिलहाल बालाघाट में प्रशासनिक हलचल तेज है और कर्मचारी आर-पार की लड़ाई के मूड में दिखाई दे रहे हैं।
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