सीईओ का आदेश भी बेअसर...पत्र जारी आदेश जारी पर कार्रवाई गायब...एक महीना बीत गया…जांच टीम अब तक लापता...जांच के नाम पर सन्नाटा… आखिर किसे बचाया जा रहा...?

10 Mar, 2026 415 व्यूज
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नायक दर्पण/बालाघाट।
जनपद पंचायत किरनापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत मड़कापार में सुदूर सड़क निर्माण कार्य के दौरान मजदूरों की जगह मशीनों से काम कराए जाने की शिकायत पर जिला पंचायत द्वारा जांच के आदेश जारी किए जाने के बाद भी एक माह बीत जाने के बावजूद जांच शुरू नहीं हो सकी है। इससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी संदेह गहराता जा रहा है।
गौरतलब है कि इस मामले को लेकर नायक दर्पण समाचार पत्र में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें ग्राम के जागरूक नागरिक द्वारा आरोप लगाया गया था कि ग्राम पंचायत मड़कापार में सुदूर सड़क निर्माण कार्य में मजदूरों को रोजगार देने के बजाय मशीनों से काम कराया गया। यह कार्य ग्रामीण विकास योजनाओं के नियमों के विपरीत बताया गया। क्योंकि ऐसी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना होता है। समाचार प्रकाशित होने के बाद जिला पंचायत बालाघाट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संज्ञान लिया और दिनांक 13 फरवरी 2026 को पत्र क्रमांक 1988/जि.पं./शिका.शा./2026 जारी कर संबंधित अधिकारियों को मामले की तथ्यात्मक जांच के निर्देश दिए। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि शिकायत समाचार में उल्लेखित बिंदुओं और तथ्यों की विस्तार से जांच की जाए और स्पष्ट अभिमत के साथ सात दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन जिला पंचायत कार्यालय को प्रस्तुत किया जाए।
जांच के लिए संबंधित अधिकारियों श्री एम.के. इक्का कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क.01 बालाघाट, श्री विकास रघुवंशी परियोजना अधिकारी जिला पंचायत बालाघाट, श्री वेनेश्वर बिसेन प्र. खण्ड पंचायत अधिकारी जनपद पंचायत किरनापुर को निर्देशित किया गया था कि वे मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति का अवलोकन करें। मजदूरों और ग्रामीणों के बयान लें तथा यह सुनिश्चित करें कि कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ है। साथ ही ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और संबंधित अधिकारियों से भी आवश्यक दस्तावेजों की जांच कर तथ्य सामने लाने को कहा गया था।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि सीईओ के स्पष्ट निर्देश के बावजूद आज एक माह बीत जाने के बाद भी जांच टीम द्वारा न तो मौके पर पहुंचकर जांच की गई और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई सामने आई है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि आखिर जांच आदेश के बावजूद जांच प्रक्रिया क्यों शुरू नहीं की गई। स्थानीय जागरूक लोगों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच की जाती तो सच्चाई सामने आ सकती थी। लेकिन जांच में हो रही देरी से लोगों के मन में संदेह पैदा हो रहा है कि कहीं मामले को दबाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा है। जागरूक ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि यदि निर्माण कार्य में वास्तव में मशीनों का उपयोग हुआ है तो यह ग्रामीण रोजगार योजनाओं की मूल भावना के खिलाफ है और इसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
सूत्रों की मानें तो इस मामले में कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव की चर्चा भी क्षेत्र में जोर पकड़ रही है। कहा जा रहा है कि कथित तौर पर कुछ सफेदपोश नेताओं के दबाव के कारण जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है।
प्रशासनिक हलकों में भी यह चर्चा है कि जब जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा स्पष्ट आदेश जारी किया जा चुका है तो संबंधित जांच टीम की जिम्मेदारी बनती है कि वे निर्धारित समय सीमा में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। लेकिन यदि आदेश के बाद भी जांच नहीं होती है तो यह सीधे-सीधे प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी मानी जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर क्यों एक गंभीर मामले पर जारी जांच आदेश के बाद भी कार्रवाई ठंडी पड़ी हुई है? क्या जांच टीम वास्तव में आदेशों की अनदेखी कर रही है या फिर किसी दबाव के चलते मामले को टालने की कोशिश हो रही है?
अब देखना यह होगा कि जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी इस मामले को लेकर आगे क्या कदम उठाते हैं। यदि जांच में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया जाता है तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं जागरूक ग्रामीणों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष और जल्द से जल्द जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ताकि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनी रहे और ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा हो सके। फिलहाल सवाल यही है कि आखिर सीईओ के आदेश के बाद भी जांच क्यों नहीं हुई और जांच टीम किसके दबाव में चुप बैठी है?

इनका कहना है।
जब हमारी टीम ने दूरभाष पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से जांच मामले को लेकर जानकारी ली गई तो उन्होंने कहाँ हम जांच टीम को पूछ लेते है क्यों नहीं अब तक जांच और जल्द जांच करने टीम को बोल देते है।
अभिषेक सराफ
मुख्य कार्यपालन अधिकारी
जिला पंचायत बालाघाट