एक महीने से ठंडे बस्ते में दबा घोटाला! सीईओ अभिषेक सराफ साहब का आदेश महज कागज़ का टुकड़ा साबित। सरपंच नंदकिशोर चंद्रवंशी, सचिव यशवंतराव मालये को बचाने की साजिश या कमीशन का खेल?

17 Mar, 2026 236 व्यूज
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नायक दर्पण/बालाघाट।
क्या जिला पंचायत बालाघाट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ का आदेश अब मजाक बन चुका है? क्या जांच टीम जिला सीईओ से भी ऊपर हो गई है? या फिर ग्राम पंचायत मडकापार के सरपंच नंदकिशोर चंद्रवंशी और सचिव यशवंतराव मालये ने गांधी की हरी पत्ती देकर पूरी जांच टीम की आंखें बंद करा दी हैं? 13 फरवरी 2026 को जारी सख्त आदेश पत्र के बावजूद आज 16 मार्च तक न तो जांच दल मडकापार पहुंचा न ही कोई रिपोर्ट तैयार की गई। मजदूरों की जगह मशीनों से सड़क बनवाने का घोटाला अब खुले आम चल रहा है। जबकि गरीब मजदूर बेरोजगार बैठे हैं।

सबसे पहले जानिए पूरा मामला
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नायक दर्पण समाचार पत्र में खबर प्रकाशित हुई थी। शिकायत थी जनपद पंचायत किरनापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत मडकापार में सुदूर सड़क निर्माण कार्य में मजदूरों को काम न देकर मशीनों से काम कराने की। यह कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए था। लेकिन सरपंच और सचिव ने मिलकर ठेकेदारों के साथ सांठगांठ कर मशीनें लगा दीं। स्थानीय मजदूरों का आरोप था कि लाखों रुपये का भ्रष्टाचार हो रहा है। मजदूरों का हक मारा जा रहा है और पंचायत फंड का दुरुपयोग किया जा रहा है।
खबर प्रकाशित के तुरंत बाद जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सराफ ने एक्शन लिया। 13 फरवरी 2026 को जारी आदेश क्रमांक 1988/जि.प./शि.का.शा./2026 में साफ-साफ लिखा गया जनपद पंचायत किरनापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत मडकापार में सुदूर सड़क निर्माण कार्य में मजदूरों की जगह मशीनों से कार्य कराए जाने संबंधी शिकायत की जांच आदेश संबंधित तीन अधिकारियों को संबोधित था 1.श्री एम.के. इक्का कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्र.01 बालाघाट, 2. श्री विकास रघुवंशी परियोजना अधिकारी, जिला पंचायत बालाघाट, 3. श्री वेनेश्वर बिसेन प्रखंड पंचायत अधिकारी जनपद पंचायत किरनापुर।
आदेश में स्पष्ट निर्देश था उपरोक्त विषयांतर्गत नायक दर्पण बालाघाट समाचार पत्र में प्रकाशित खबर शिकायत समाचार की छायाप्रति संलग्न कर आपकी ओर प्रेषित है। उक्त शिकायत समाचार में उल्लेखित बिंदुओं/तथ्यों की तथ्यात्मक जांच की जाकर जांच प्रतिवेदन 07 दिवस के भीतर अपने स्पष्ट अभिमत सहित अधोहस्ताक्षरकर्ता कार्यालय को अनिवार्यतः प्रेषित करना सुनिश्चित करें।
संलग्न दस्तावेज के साथ आदेश की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद किरनापुर, सरपंच मडकापार और अन्य को भी भेजी गई। यानी पूरा सिस्टम जानता था कि 7 दिन में रिपोर्ट आनी चाहिए। लेकिन 32 दिन बीत गए एक चिट्ठी तक नहीं आई।
स्थानीय जागरूक लोग अब खुलकर आरोप लगा रहे हैं। एक प्रभावशाली स्थानीय नागरिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया सरपंच नंदकिशोर चंद्रवंशी और सचिव यशवंतराव मालये ने जांच टीम को अच्छी-खासी रकम कमीशन दे दी है। यही वजह है कि आज तक कोई भी अधिकारी मडकापार नहीं पहुंचा। क्या जिला पंचायत सीईओ का आदेश अब कागज का टुकड़ा बन गया है? जांच टीम सरपंच-सचिव को बचाने में लगी है। क्या सीईओ खुद भी इस घोटाले में शामिल हैं या फिर वे मजाक-मजाक में आदेश निकाल देते हैं?
यह सवाल सिर्फ मडकापार तक सीमित नहीं। पूरे बालाघाट जिले में पंचायती राज व्यवस्था की साख पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत आने वाले सुदूर सड़क निर्माण में अगर मजदूरों की जगह मशीनें लगाई जाएंगी तो बेरोजगारी कैसे कम होगी? मनरेगा जैसी योजनाओं का क्या होगा? मडकापार के दर्जनों मजदूर परिवार आज भी रोजगार की तलाश में हैं। लेकिन सरपंच-सचिव के मशीन घोटाले ने उन्हें बेरोजगार बना दिया।
जिला पंचायत के सूत्रों का कहना है कि आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर कार्यालय और अन्य अधिकारियों को भेजी गई थी. लेकिन कोई फॉलो-अप नहीं हुआ। आदेश क्रमांक 1989 के तहत प्रतिलिपि भी भेजी गई थी जिसमें कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी किरनापुर, सरपंच मडकापार और प्रधान संपादक नायक दर्पण को सूचनार्थ भेजा गया फिर भी चुप्पी। क्या यह सरासर लापरवाही है या फिर ऊपर से नीचे तक का भ्रष्टाचार?
एक जागरूक नागरिक ने कहा अगर 7 दिन में रिपोर्ट नहीं आई तो सीईओ को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी। लेकिन एक महीना बीत गया और अभी तक कोई नोटिस तक नहीं। लगता है जांच टीम ने सरपंच-सचिव से हरी झंडी ले ली है।
यह मामला सिर्फ एक गांव का नहीं है। पूरे मध्य प्रदेश में पंचायत स्तर पर ऐसे घोटाले आम हो गए हैं। सुदूर सड़क निर्माण में मशीनों का इस्तेमाल कर मजदूरों का हक मारना फंड का गबन करना और फिर जांच को दबाना यह फॉर्मूला अब खुलेआम चल रहा है। बालाघाट जिले में पहले भी कई गांवों में ऐसी शिकायतें आई हैं। लेकिन कार्रवाई शून्य।
अब सवाल यह है कि जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सराफ इस पर क्या कार्रवाई करेंगे? क्या वे स्वयं जांच दल को बुलाकर जवाब तलब करेंगे या फिर मामला दबा देंगे? क्या कलेक्टर कार्यालय अब सक्रिय होगा?
मडकापार के जागरूक गांववासी अब चुप नहीं बैठेंगे। वे कह रहे हैं। हम सीएम हाउस तक जाएंगे लेकिन घोटाले की सच्चाई बाहर निकालेंगे। नायक दर्पण ने भी इस मुद्दे को लगातार उठाया है। अब देखना है कि जिला प्रशासन इस तीखे मुद्दे पर कितनी गंभीरता दिखाती है।
अगर जांच टीम 7 दिन का समय मानती तो आज तक रिपोर्ट आ चुकी होती। लेकिन 32 दिन बाद भी चुप्पी तो यही बता रही है कि कहीं न कहीं कमीशन का खेल चल रहा है। सरपंच नंदकिशोर चंद्रवंशी और सचिव यशवंतराव मालये को बचाने के लिए पूरा सिस्टम एकजुट हो गया है।
जिला पंचायत बालाघाट के इस घोटाले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पंचायती राज व्यवस्था में भ्रष्टाचार कितना गहरा है। मजदूरों का हक विकास का पैसा और सरकारी आदेश सब कुछ अब मशीनों और कमीशन के आगे फीका पड़ गया है।