केंद्रीय विद्यालय में बाल वाटिका शुरू न होने से बढ़ा अभिभावको पर बोझ... 14 जिलों से पीछे सिवनी महंगी पढ़ाई ने बढ़ाई चिंता सांसद की चुप्पी पर उठे सवाल...!
30 Mar, 2026
310 व्यूज
सिवनी-नायक दर्पण
मध्यप्रदेश के कई जिलों में नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने के प्रयास तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन सिवनी जिला आज भी इस दिशा में पीछे नजर आ रहा है। केंद्रीय विद्यालय सिवनी में अब तक बाल वाटिका कक्षा शुरू नहीं हो पाई है जबकि प्रदेश के लगभग 14 जिलों के केंद्रीय विद्यालयों में यह व्यवस्था पहले ही लागू की जा चुकी है। इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं बल्कि सैकड़ों छोटे बच्चों और उनके अभिभावकों को भी इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए बाल वाटिका की अवधारणा लागू की गई थी, ताकि प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत आधार मिल सके। लेकिन सिवनी में इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो पाई है। नतीजतन, जिले के छोटे-छोटे बच्चे आज भी इस सुविधा के इंतजार में हैं।
सांसद की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल....
इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा बालाघाट-सिवनी क्षेत्र की सांसद भारती पारधी की भूमिका को लेकर हो रही है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण शिक्षा मुद्दे पर सांसद स्तर से अब तक कोई ठोस पहल या हस्तक्षेप सामने नहीं आया है।लोगों का आरोप है कि जब प्रदेश के अन्य जिलों में केंद्रीय विद्यालयों में बाल वाटिका शुरू हो चुकी है, तब सिवनी में इसकी शुरुआत के लिए सांसद द्वारा न तो केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय से कोई स्पष्ट संवाद किया गया और न ही स्थानीय स्तर पर कोई ठोस दबाव बनाया गया।
अभिभावकों का कहना है कि यदि सांसद इस मुद्दे को प्राथमिकता में रखते हुए पहल करतीं, तो यह सुविधा अब तक जिले में शुरू हो सकती थी। कई लोगों ने यह भी कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी समझ से परे है।
अभिभावकों पर बढ़ता आर्थिक बोझ...
बाल वाटिका शुरू न होने का सीधा असर अभिभावकों की जेब पर पड़ रहा है। मजबूरी में उन्हें अपने बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाना पड़ रहा है, जहां नर्सरी की फीस 25 हजार से 30 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। इसके अलावा किताबों और अन्य शैक्षणिक सामग्री के नाम पर भी भारी खर्च करना पड़ता है।एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह खर्च उठाना बेहद कठिन होता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो कई परिवार ऐसे हैं, जो सिर्फ आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों को अच्छी प्रारंभिक शिक्षा नहीं दिला पा रहे हैं।
सरकारी व्यवस्था में सस्ती और बेहतर शिक्षा संभव...
यदि केंद्रीय विद्यालय सिवनी में बाल वाटिका शुरू हो जाए तो अभिभावकों को बड़ी राहत मिल सकती है। यहां मासिक फीस मात्र 500 से 600 रुपये के बीच होती है यानी पूरे साल की फीस करीब 6000 रुपये में पूरी हो जाती है।किताबों का खर्च भी बेहद कम है करीब 500 रुपये में पूरा सेट उपलब्ध हो जाता है। इस तरह सरकारी व्यवस्था के माध्यम से कम लागत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव है लेकिन सिवनी के बच्चे इस सुविधा से वंचित हैं।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जवाब की मांग...
स्थानीय लोगों और अभिभावकों में इस मुद्दे को लेकर लगातार नाराजगी बढ़ रही है। कई अभिभावकों ने बताया कि उन्होंने स्कूल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।अब लोगों की मांग है कि सांसद भारती पारधी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए तत्काल हस्तक्षेप करें और केंद्र व संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर केंद्रीय विद्यालय सिवनी में बाल वाटिका कक्षा जल्द शुरू कराएं।
बड़ा सवाल अब भी कायम...
जब प्रदेश के अन्य जिलों में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है तो सिवनी को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है? आखिर कब तक यहां के बच्चे इंतजार करते रहेंगे..?
अब देखने वाली बात यह होगी कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन इस मुद्दे पर कब जागते हैं और सिवनी के नन्हे बच्चों को उनका अधिकार कब मिलता है।
शेयर करें
लिंक कॉपी हो गया!