अतरिया में स्वच्छता का ‘सिस्टम’ सड़ा—आधा अधूरा शौचालय, पूरी रकम साफ! स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर भ्रष्टाचार की बू, ग्राम अतरिया का सामुदायिक शौचालय बना बदहाली की मिसाल

03 Apr, 2026 148 व्यूज
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नायक दर्पण/बालाघाट।
स्वच्छता को लेकर देशभर में बड़े-बड़े दावे और योजनाएं ज़मीन पर किस हद तक खोखली साबित हो रही हैं। इसका जीता-जागता उदाहरण जनपद पंचायत बैहर अंतर्गत ग्राम पंचायत केवलारी के ग्राम अतरिया में देखने को मिला है। यहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मित सामुदायिक स्वच्छता परिसर आज बदहाली भ्रष्टाचार और लापरवाही का प्रतीक बन चुका है।
ग्रामीणों के अनुसार शौचालय निर्माण कार्य आधा-अधूरा छोड़ दिया गया, लेकिन जिम्मेदारों ने पूरी राशि आहरित कर ली। मौके पर पहुंचकर देखने पर जो तस्वीर सामने आई वह सरकारी दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। भवन बाहर से भले ही खड़ा नजर आता है, लेकिन अंदर प्रवेश करते ही हालात चौंकाने वाले हैं। फर्श पर गंदगी, टूटी ईंटें, बिखरा मलबा और उखड़े हुए उपकरण साफ संकेत देते हैं कि निर्माण कार्य कभी पूरा ही नहीं किया गया।
शौचालय के अंदर की स्थिति बेहद चिंताजनक है। जहां शौचालय सीट होनी चाहिए। वहां सिर्फ खाली ढांचा और टूटी-फूटी सामग्री पड़ी है। कई जगहों पर सीटें अलग पड़ी मिलीं तो कहीं निर्माण सामग्री यूं ही बिखरी नजर आई। न पानी की कोई व्यवस्था है, न सफाई की दीवारों पर दाग और फर्श पर जमी गंदगी यह दर्शाती है कि इस परिसर का उपयोग तो दूर इसकी देखरेख तक नहीं की गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं बरती गईं। पंचायत स्तर पर मिलीभगत कर घटिया निर्माण किया गया और फिर बिना काम पूरा किए ही भुगतान निकाल लिया गया। हमने कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई एक ग्रामीण ने नाराजगी जताते हुए नायक दर्पण की टीम से चर्चा में कहा इस शौचालय का लाभ गांव के लोगों को कभी मिला ही नहीं बल्कि यह अब असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है।
सबसे गंभीर बात यह है कि स्वच्छ भारत मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना जिसका उद्देश्य खुले में शौच से मुक्ति और स्वच्छता को बढ़ावा देना है। उसी के नाम पर इस तरह की लापरवाही सामने आ रही है। सरकारी रिकॉर्ड में यह शौचालय पूर्ण दिखाया जा रहा है लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया। दीवारों में दरारें, अधूरी फिटिंग और घटिया सामग्री का इस्तेमाल साफ दिखाई देता है। इससे न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है बल्कि गांव के लोगों के साथ भी धोखा हुआ है।
यह मामला केवल एक शौचालय तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। आखिर कैसे बिना निर्माण पूरा हुए भुगतान कर दिया गया? किसने कार्य की जांच की? और क्यों जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंद लीं? यह ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अब प्रशासन को देना होगा।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही अधूरे पड़े इस शौचालय का निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा कराया जाए। ताकि गांव के लोगों को इसका लाभ मिल सके अगर समय रहते ऐसे मामलों पर कार्रवाई नहीं की गई तो स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी। अतरिया का यह मामला साफ दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर निगरानी और पारदर्शिता की कितनी सख्त जरूरत है।
अतरिया का यह ‘स्वच्छता परिसर’ अब स्वच्छता का प्रतीक नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की बदबू फैलाता ढांचा बन चुका है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता दिखाता है या फिर यह मामला भी जांच कर लीपापोती कर फाइलों में दबकर रह जाएगा।