जंगल जला तो राख हुई हरियाली, पर जिम्मेदारों ने फिर भी ओढ़ ली खामोशी की चादर काली। बांस जलते रहे, अफसर कहते रहे हमें खबर ही नहीं, सच ये है कि लापरवाही छुपती नहीं कहीं।
09 Apr, 2026
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वन विकास निगम विगत लंबे समय से विवादों में है,हालांकि वन विभाग में तरह-तरह के भ्रष्टाचार करने के तरीके अपनाए जाते हैं परंतु जब मामला उजागर होता है तो उच्च अधिकारियों के हाथ पांव फूलने लगते हैं मजबूर वश जांच करानी पड़ती है । परंतु ऐसे कई उदाहरण स्वरूप मामले हैं जिनमें अपने कर्मचारी को बचाने की उच्च अधिकारी हर संभव कोशिश करता है, लेकिन ऐसे लापरवाह अधिकारियों को संरक्षण देने की वजह से वन संपदा नष्ट एवं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है।जिसका कहीं ना कहीं श्रेय उच्च अधिकारियों को भी जाता है ।जबकि गंभीर मामले में उच्च अधिकारी को जागरूकता दिखाते हुए तत्काल लाफरवाही बरतने वाले कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई करना चाहिए।
नायक दर्पण/बालाघाट
वन विकास निगम की घोर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। उकवा परिक्षेत्र अंतर्गत सर्किल बारिया के कक्ष क्रमांक 1156, बीट पूर्व मोहगांव में आग लगने से लगभग दो ट्रक बांस जलकर खाक हो गए। इस घटना में करीब 16 एंटी बांस नष्ट हो गए, जिनकी अनुमानित लागत लगभग 50 हजार रुपए बताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी क्षति के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिक्षेत्र अधिकारी अजय कामडे एवं परिक्षेत्र सहायक भोजेलाल टेकाम के संरक्षण में हो रही अनियमितता अब उच्च अधिकारियों को निशाना बना रही है,अपने कार्य के प्रति लाफरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों ने शासन का हजारों रुपए आग में जला दिया बावजूद इसके परिक्षेत्र अधिकारी अजय कामडे का कहना है कि मुझे बांस जलने की जानकारी नहीं है और न ही मेरे कार्यक्षेत्र की घटना है । आखिर जिम्मेदार अधिकारी क्यों पल्ला झाड़ रहे हैं? उच्च अधिकारी अगर उचित जांच कराए तो निश्चित ही लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई निश्चित है ।
*परिक्षेत्र अधिकारी अजय कामडे एवं परिक्षेत्र सहायक भोजेलाल टेकाम की लाफरवाही के चलते हुआ नुकसान*
बता दे कि वन विकास निगम परियोजना परिक्षेत्र लामता के अंतर्गत आने वाला परिक्षेत्र उकवा के बारिया सर्किल में वर्तमान बीट एवं सर्किल प्रभारी भोजेलाल टेकाम की लापरवाही के चलते यह नुकसान हुआ है। यदि समय रहते निगरानी और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए होते तो इस प्रकार की घटना को रोका जा सकता था। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि वन संपदा की सुरक्षा को लेकर निगम के जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर शासन को आर्थिक नुकसान के रूप में भुगतना पड़ रहा है। बावजूद इसके जानकारी देने पर अधिकारी मौके स्थल से सबूत मिटाने पर ज्यादा जोर लगा रहे हैं । जिससे यह साबित होता है कि वन विभाग के जिम्मेदारों को आगजनी की घटना पहले से ही पता थी अब वह खुद को बचाने की रणनीति अपना रहे हैं ।
*वन विकास निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल?*
परिक्षेत्र उकवा के अंतर्गत आग से हजारों रुपए के बांस जलने की घटना ने वन विकास निगम की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। आखिर कब तक लापरवाही के कारण सरकारी संपत्ति यूं ही जलकर राख होती रहेगी?जबकि घटना के बारे में उच्च अधिकारी को भी अवगत करा दिया गया है परंतु अब तक मामले को संज्ञान में नहीं लिया गया ।अब देखना यह होगा कि उच्च अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है। अगले अंक में विस्तृत रूप से सम्मिलित अधिकारी एवं लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी के नाम के साथ खबर का प्रकाशन किया जाएगा ।
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