मड़कापार में सरपंच-सचिव का भ्रष्टाचार का नया खेल: तीन लाख के सभा मंच में आधा काम,राशि पूरी हड़पा! जिला पंचायत CEO की मिलीभगत से हौसले बुलंद, जनता का टैक्स का पैसा उड़ा रहे जिम्मेदार।

19 Apr, 2026 41 व्यूज
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विशेष संवाददाता
नायक दर्पण/बालाघाट।
किरनापुर जनपद मड़कापार ग्राम पंचायत एक बार फिर भ्रष्टाचार के अंधेरे में डूब गई है। जहां एक ओर पूर्व में नायक दर्पण की टीम द्वारा जेसीबी मशीन से कराए गए सुदूर सड़क निर्माण के घोटाले को उजागर किए जाने के बाद जिला पंचायत ने जांच टीम भेजी थी। लेकिन आज तक जांच रिपोर्ट तैयार नहीं हुई और जिम्मेदारों को सौंपा नहीं गया वहीं सरपंच, सचिव और उपयंत्री ने अब नया कारनामा कर डाला। वर्ष 2025 में स्वीकृत तीन लाख रुपये की लागत वाले सभा मंच के निर्माण में काम अधूरा छोड़कर राशि अधिक निकाल ली गई। सूत्रों का कहना है कि यह घोटाला जिला पंचायत के सीईओ की मिलीभगत के बिना संभव नहीं था। जनता के टैक्स का पैसा को सरपंच,सचिव खुलेआम लुट रहे है और जिम्मेदार अधिकारी बेखौफ घूम रहे हैं। मड़कापार के सरपंच, सचिव और उपयंत्री की तिकड़ी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पंचायत विकास का नाम पर भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुकी है। सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2025 में पंचायत को सभा मंच निर्माण की स्वीकृति मिली थी। कुल स्वीकृत राशि तीन लाख रुपये थी। मंच का काम शुरू भी हुआ, लेकिन जैसे ही आधा काम पूरा हुआ, सरपंच-सचिव की जोड़ी ने बिल पास करा दिया। पूरा काम अधूरा है, लेकिन राशि का बड़ा हिस्सा निकाल लिया गया। ग्रामीणों की नजर में मंच अब भी अधूरा पड़ा है न फर्श पूरा, न दीवारें चढ़ी, न छत बनी। फिर भी खाते में पैसे डाले जा चुके हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि कम काम, ज्यादा राशि क्लासिक भ्रष्टाचार का फॉर्मूला।
यह पहला मामला नहीं है कुछ महीने पहले नायक दर्पण की टीम ने जब जेसीबी मशीन से सुदूर सड़क निर्माण का घोटाला उजागर किया था तो पूरा प्रशासन हिल गया था। जिला पंचायत ने तुरंत जांच टीम गठित की। टीम ने साइट विजिट किया माप-जोख लिया लेकिन रिपोर्ट आज तक तैयार नहीं हुई। जिम्मेदार सरपंच, सचिव और उपयंत्री पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा, इनके हौसले और बुलंद हो गए। सूत्रों का आरोप है कि जिला पंचायत के सीईओ के साथ गठजोड़ के कारण ही ये अधिकारी इतने बेखौफ हैं। जांच रिपोर्ट दबाए रखने और नई घोटालों को अंजाम देने का सिलसिला यही मिलीभगत दर्शाता है।
ग्रामीणों में आक्रोश चरम पर है। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया विधायक निधि से सभा मंच बनवाने के नाम पर तीन लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। हमने सोचा था कि गांव में बैठकें, त्योहार और कार्यक्रम होंगे। लेकिन आज मंच का आधा हिस्सा भी नहीं बना। सरपंच कहते हैं काम पूरा हो गया, लेकिन नजर डालिए प्लास्टर तक नहीं हुआ। पैसा कहां गया? सचिव और उपयंत्री मिलकर बिल पास करा रहे हैं।दूसरे ग्रामीण ने कहा पहले सड़क का घोटाला अब मंच का। जिला पंचायत CEO साहब को क्या पता नहीं? या फिर सब जानते हुए भी चुप हैं? जनता का टैक्स का पैसा इनके जेब में जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो यह घोटाला सिर्फ मड़कापार तक सीमित नहीं है। पूरे किरनापुर जनपद में सरपंच-सचिव-उपयंत्री की ऐसी तिकड़ियां सक्रिय हैं जहां विकास कार्यों के नाम पर राशि हड़प ली जाती है। सड़क हो, नाली हो, मंच हो या कोई अन्य योजना हर जगह कम काम, ज्यादा बिल। और जब कोई उजागर करता है तो जिला स्तर पर रिपोर्ट दबा दी जाती है। इस बार भी वही हो रहा है। जांच टीम ने रिपोर्ट बनाई या नहीं, यह तो पता नहीं, लेकिन सरपंच और सचिव की मनमानी जारी है। यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं बल्कि व्यवस्था की नाकामी का भी है। जहां ग्रामीण विकास मंत्रालय और राज्य सरकार पंचायतों को मजबूत बनाने की बात करती है। वहीं यहां पंचायतें भ्रष्टाचार के अड्डे बन चुकी हैं। तीन लाख रुपये का सभा मंच एक छोटा कार्य, लेकिन इसका मतलब है कि गांव की सभाएं, चुनावी बैठकें, त्योहार सब प्रभावित हो रहे हैं। बच्चे खेलने के लिए जगह नहीं, महिलाएं बैठक के लिए छत नहीं। पैसा कहां गया? सरपंच के खाते में, सचिव के कमीशन में या उपयंत्री की जेब में?
मीडिया ने पहले भी सड़क घोटाले को लेकर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी। उस समय जिला पंचायत ने आश्वासन दिया था कि जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। लेकिन आज स्थिति यह है कि जांच रिपोर्ट तैयार नहीं हुई और नए घोटाले सामने आ गए। क्या जिला पंचायत CEO इस तिकड़ी के संरक्षक बन गए हैं? क्या रिपोर्ट दबाने के पीछे कोई बड़ा सांठ-गांठ है? ग्रामीणों का सवाल जायज है अगर जांच टीम गई थी तो रिपोर्ट कहां है? अगर रिपोर्ट तैयार है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
सरपंच, सचिव और उपयंत्री के खिलाफ अब ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। कई लोग लिखित शिकायत करने की तैयारी में हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि जिला पंचायत और कलेक्टर स्तर पर तुरंत संज्ञान नहीं लिया गया तो यह घोटाला और बड़ा रूप ले सकता है। तीन लाख रुपये का मंच घोटाला छोटा लग सकता है, लेकिन यह पूरे पंचायत तंत्र में फैले भ्रष्टाचार का आईना है। जनता का टैक्स का पैसा जिससे सड़कें, स्कूल, अस्पताल बनने चाहिए उसकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
मीडिया की टीम लगातार इस तरह के भ्रष्टाचार को उजागर करता रहा है। लेकिन अब सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा? क्या सीईओ साहब खुद जांच कराएंगे या फिर रिपोर्ट दबाने का सिलसिला जारी रहेगा? मड़कापार के ग्रामीण अब चुप नहीं रहना चाहते। वे चाहते हैं कि सभा मंच का बचा काम तुरंत पूरा किया जाए, निकाली गई अतिरिक्त राशि वसूली जाए और दोषी सरपंच, सचिव व उपयंत्री पर तुरंत कार्रवाई हो।
यह भ्रष्टाचार केवल पैसे का नहीं विश्वास का भी हनन है। ग्रामीण पंचायतों में जनता अपने प्रतिनिधियों पर भरोसा करती है। लेकिन जब सरपंच-सचिव मिलकर जनता का पैसा लूटते हैं तो लोकतंत्र की जड़ें हिल जाती हैं। किरनापुर जनपद के अन्य गांवों में भी ऐसी खबरें आ रही हैं। क्या पूरा जनपद भ्रष्टाचार की चपेट में है?
मीडिया अब इस मामले की और गहराई से जांच करेगा। हमारी टीम ने जिला पंचायत सीईओ से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। क्या वे रिपोर्ट दबाने में व्यस्त हैं? या फिर मड़कापार के घोटाले की पोल खुलने से डर रहे हैं?
ग्रामीणों का आह्वान है अब चुप्पी तोड़ो। लिखित शिकायत करो। मीडिया के सामने आओ। क्योंकि जब तक जनता नहीं जागेगी, सरपंच-सचिव-उपयंत्री और उनके संरक्षक बेखौफ घोटाले करते रहेंगे। तीन लाख का मंच घोटाला आज उजागर हुआ है, कल और बड़े घोटाले सामने आएंगे।