हितग्राही नहीं, बाहरी लोग रह रहे,पीएम आवास योजना पर उठे सवाल। आवास बेचने और कब्जे के गंभीर आरोप,कार्रवाई की मांग तेज।
19 Apr, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
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जिले के जनपद पंचायत परसवाड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत परसवाड़ा में प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े दो मकानों पर अवैध कब्जे और कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। इस संबंध में ग्राम के ही निवासी हरीश श्रीवास ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) परसवाड़ा को लिखित आवेदन सौंपकर जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। आवेदन के बाद क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आवेदन में बताया गया है कि ग्राम पंचायत परसवाड़ा में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दो हितग्राहियों धंशु एवं मोहन को आवास स्वीकृत हुए थे। दोनों हितग्राहियों का पूर्व में ही निधन हो चुका है और उनके नाम पर बनाए गए मकानों में वर्तमान में कोई वैध वारिस निवास नहीं कर रहा है। आरोप है कि बाहरी व्यक्तियों ने मकान में अवैध कब्जा किया है या इन मकानों को ग्राम पंचायत के जिम्मेदार प्रतिनिधियों द्वारा मिलीभगत कर अवैध रूप से बाहरी व्यक्तियों को सौंप दिया गया है।
आवेदनकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि जिन व्यक्तियों को ये मकान दिए गए हैं। वे ग्राम के मूल निवासी नहीं हैं और उनकी पहचान भी संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि इन बाहरी व्यक्तियों द्वारा न केवल अवैध रूप से मकानों पर कब्जा किया गया है। बल्कि वहां संदिग्ध गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं जिससे ग्रामवासियों में भय और असुरक्षा का माहौल बन रहा है।
ग्रामवासियों ने कहा प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जाती है। लेकिन यदि इस प्रकार की अनियमितताएं सामने आती हैं तो योजना की मंशा पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि मृत हितग्राहियों के मकानों को नियमों के विरुद्ध बेच दिया गया जो कि पूरी तरह अवैध है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल सरकारी योजना का दुरुपयोग है। बल्कि भ्रष्टाचार की श्रेणी में भी आता है। आवेदनकर्ता ने मांग की है कि दोनों मकानों को शासन के नियमों के अनुसार पुनः अधिग्रहित कर पात्र हितग्राहियों को सौंपा जाए।
इस मामले में अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो ऐसे मामलों को बढ़ावा मिल सकता है और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।
गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में यह मामला भी प्रशासन के लिए एक परीक्षा की तरह है। जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी होगा। फिलहाल ग्राम पंचायत परसवाड़ा का यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।
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