विश्राम दिवस पर हनुमान भक्ति की अमृतधारा—सेवा, शक्ति और समर्पण का संदेश, हवन-महाप्रसाद में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

12 Jan, 2026 16 व्यूज
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कोठिया सिवनी
श्रीराम कथा के विश्राम दिवस के पावन अवसर पर गुरुधाम परिसर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। इस अवसर पर पूज्य पं. श्री नीलैश शास्त्री जी महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचन में भगवान श्री हनुमान जी के चरित्र, पराक्रम और निष्काम भक्ति का भावपूर्ण वर्णन करते हुए सेवा, शक्ति और समर्पण के गूढ़ रहस्य को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया।
महाराज श्री ने कहा कि हनुमान जी केवल अपार शक्ति के प्रतीक नहीं, बल्कि वे आज्ञापालन, विनम्रता और निष्काम सेवा के सजीव आदर्श हैं। जब मन से अहंकार समाप्त हो जाता है और कर्म केवल प्रभु सेवा के लिए होता है, तब सामान्य व्यक्ति भी असाधारण कार्य करने में सक्षम हो जाता है। “रामकाज में लगे रहना ही हनुमानत्व है”—यही भाव हर भक्त के जीवन का लक्ष्य होना चाहिए।
उन्होंने वर्तमान युग की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तनाव, भटकाव और अहंकार से ग्रस्त मानव को यदि आत्मबल, धैर्य और सकारात्मक ऊर्जा चाहिए तो हनुमान जी के आदर्शों को अपनाना होगा। कथा के दौरान पूरा पंडाल “जय श्रीराम” और “जय बजरंगबली” के जयघोष से गूंज उठा, जिससे वातावरण भक्तिरस से ओतप्रोत हो गया।
विश्राम दिवस के उपलक्ष्य में प्रातः वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशाल हवन संपन्न हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुतियाँ अर्पित कर परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की। हवनोपरांत महाप्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया।
आयोजन समिति के अनुसार यह विश्राम दिवस आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन और धार्मिक एकता का प्रतीक बना। पूरे आयोजन से ग्राम कोठिया एवं आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक उल्लास का वातावरण व्याप्त रहा।