जब प्राचार्य ही समय के पाबंद नहीं तो अनुशासन की उम्मीद कैसी...?मुंगवानी कलाॅ शासकीय स्कूल में लापरवाही उजागर ..!

16 Jan, 2026 282 व्यूज
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नायक दर्पण| सिवनी
मुंगवानी कला स्थित शासकीय हाई स्कूल में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। विद्यालय में व्याप्त अव्यवस्था का मुख्य कारण प्राचार्य रवि सिंह डहेरिया की लापरवाही और नियंत्रणहीनता बताया जा रहा है। स्थिति यह है कि जब स्वयं प्राचार्य ही समयपालन और अनुशासन का पालन नहीं कर रहे, तो शिक्षक और छात्र समय पर विद्यालय कैसे पहुंचेंगे।15 जनवरी 2026 को जब मिडिया के विद्यालय पहुंचे तब सुबह 10:50 बजे तक केवल दो शिक्षक और तीन शिक्षिकाएं ही उपस्थित थी। प्रार्थना उन्हीं के द्वारा करवाई गई। प्रार्थना के बाद कुछ छात्र कक्षाओं में गए जबकि कई छात्र विद्यालय परिसर में इधर-उधर घूमते नजर आए। वहीं शिक्षक भी कक्षाओं में जाने के बजाय कार्यालय और परिसर में बैठे रहे। ग्रामीणों और छात्रों का कहना है कि प्राचार्य द्वारा नियमित निगरानी न किए जाने के कारण शिक्षक पूरी तरह बेलगाम हो चुके हैं। शिक्षिकाएं अपने छोटे बच्चों को विद्यालय लेकर आती हैं और पढ़ाई के समय उन्हें खिलाने, घुमाने में व्यस्त रहती हैं। यह क्रम लगभग एक साल से लगातार जारी है, लेकिन प्राचार्य द्वारा इस पर कोई रोक नहीं लगाई गई। इससे कक्षाओं में शोर-शराबा रहता है और बड़े बच्चों की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
इतना ही नहीं, कई शिक्षक विद्यालय समय में बस स्टैंड या अन्य स्थानों पर जाकर घंटों चाय पीते हुए समय बिताते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यह स्थिति कोई एक-दो दिन की नहीं यह लंबे समय से चल रही है।यदि जांच अधिकारी ऑनलाइन उपस्थिति रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा की जांच करें तो स्वयं स्पष्ट हो जाएगा कि कौन-कौन से शिक्षक कितने समय विद्यालय में उपस्थित होते हैं। मिडिया के पास केवल दो-तीन दिनों का विवरण उपलब्ध है, जिसमें सामने आया कि कई शिक्षक 11:00 से 11:30 अथवा 12:00 बजे तक विद्यालय पहुंचते हैं जबकि ग्रामीणों के अनुसार यह क्रम नियमित है।इस मामले पर प्राचार्य रवि सिंह डहेरिया से मिडिया ने सवाल किया तो कहने लगे मैं तो रोज शिक्षकों को समय पर आने के लिए कहता हूं मगर मेरी बात नहीं मानते। ज्यादा बोलने पर मेरी ही शिकायत कर देते हैं। यही बयान इस पूरे मामले की जड़ को उजागर करता है। जब प्राचार्य स्वयं समय का पालन और अनुशासन का उदाहरण प्रस्तुत नहीं करते तो शिक्षकों और छात्रों पर इसका सीधा असर पड़ना स्वाभाविक है।
मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी एस.एस. कुमरे ने कहा यदि इस संबंध में लिखित शिकायत प्राप्त होती है तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। इस प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
प्रमुख तथ्य
▪ प्राचार्य की लापरवाही से विद्यालय में अनुशासन पूरी तरह समाप्त
▪ शिक्षक समय पर नहीं आते कक्षाओं में नहीं जाते
▪ शिक्षिकाओं द्वारा छोटे बच्चों को कक्षा में लाने से पढ़ाई प्रभावित
▪ विद्यालय समय में बस स्टैंड पर घंटों चाय पीने की शिकायत
▪ ऑनलाइन उपस्थिति जांच से खुल सकती है सच्चाई
▪ वर्षों से चली आ रही अव्यवस्था पर अब तक कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि यदि प्राचार्य ही अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर नहीं हैं तो शिक्षक और विद्यार्थी भी नियमों का पालन नहीं करेंगे।