सीएम हेल्पलाइन” या “फेक लाइन”…? शिकायत करो समाधान नहीं दबाव मिलता है! समस्या नहीं शिकायत बंद कराओ....सीएम हेल्पलाइन में जनता की उम्मीद टूट रही जवाबदेही पर उठे सवाल...! एल-1, एल-2, एल-3 के चक्कर में फंसी जनता अधिकारी आंकड़ों का खेल दिखाने में व्यस्त...!

19 May, 2026 480 व्यूज
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नायक दर्पण/भोपाल-सिवनी।

मध्यप्रदेश सरकार की बहुचर्चित “सीएम हेल्पलाइन 181 व्यवस्था अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना अब कई शिकायतकर्ताओं के लिए “फेक लाइन” साबित होती दिखाई दे रही है। शिकायतों के आंकड़े और जमीनी हालात दोनों ही सिस्टम की गंभीर स्थिति उजागर कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार सीएम हेल्पलाइन में शुरू से अब तक करीब 3 करोड़ 75 लाख शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इनमें वर्तमान में 6 लाख 34 हजार शिकायतें लंबित हैं, जबकि 1 लाख 60 हजार शिकायतें 50 दिन से ज्यादा पुरानी हो चुकी हैं।

सिर्फ अप्रैल 2026 की बात करें तो प्रदेशभर से करीब 4.39 लाख शिकायतें दर्ज हुई लेकिन इनमें से केवल 39 प्रतिशत शिकायतों का ही निराकरण हो पाया। राजधानी भोपाल में भी हाल चिंताजनक हैं, जहां 22,615 शिकायतें लंबित हैं और उनमें से करीब 46 प्रतिशत शिकायतें दो महीने से अधिक पुरानी बताई जा रही हैं।

हेल्पलाइन या “हेल्पलेस लाइन”…?

प्रदेशभर से अप्रैल माह में 6,457 शिकायतें सामने आईं, लेकिन केवल 35 प्रतिशत मामलों का समाधान हुआ। यानी 10 में से लगभग 6 लोग आज भी अपनी समस्या के समाधान का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा बैठकों और कार्रवाई के दावे जरूर हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार आयुक्त संकेत भोंडवे लगातार समीक्षा कर रहे हैं और तीन सीएमओ को सस्पेंड भी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद हालात में सुधार नजर नहीं आ रहा।सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सख्ती और समीक्षा के बाद भी 65 प्रतिशत शिकायतें लंबित रह जाती हैं, तो क्या यह व्यवस्था सिर्फ आंकड़ों का खेल बनकर रह गई है..?

सिवनी नगर पालिका पर गंभीर आरोप....

सिवनी जिले में नगर पालिका के खिलाफ भी शिकायतकर्ताओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है। आरोप है कि लोग नगर पालिका के कार्यों से परेशान होकर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराते हैं लेकिन समस्या का समाधान करने के बजाय शिकायतकर्ताओं को फोन कर शिकायत वापस लेने या बंद कराने का दबाव बनाया जाता है।
कई शिकायतकर्ताओं का कहना है कि निराकरण के नाम पर सिर्फ “शिकायत बंद” कराने की कोशिश होती है ताकि रिकॉर्ड में निपटारा दिखाया जा सके। जबकि जमीनी स्तर पर समस्या जस की तस बनी रहती है।

जनता के सामने खड़े तीन बड़े सवाल.....

पहला सवाल-जब 181 पर शिकायत दर्ज होती है, तो लाखों मामले लंबित क्यों रहते हैं...?
दूसरा सवाल-1.60 लाख लोग 50 दिन से ज्यादा समय से समाधान का इंतजार क्यों कर रहे हैं...?
तीसरा सवाल-निराकरण की जगह शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाने की प्रवृत्ति आखिर किसके संरक्षण में चल रही है...?

व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा...

सीएम हेल्पलाइन का उद्देश्य था कि आम नागरिक सीधे शासन तक अपनी बात पहुंचा सके लेकिन अब कई मामलों में शिकायतकर्ता खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। शिकायतें एल-1, एल-2 और एल-3 स्तरों के बीच घूमती रहती हैं और अंत में या तो शिकायतकर्ता थककर शिकायत बंद कर देता है या फिर दबाव का सामना करता है।
जब तक शिकायतों के वास्तविक निराकरण जवाबदेही तय करने और “शिकायत बंद कराओ” संस्कृति पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक जनता के बीच यह धारणा मजबूत होती जाएगी कि “सीएम हेल्पलाइन” अब “हेल्पलाइन” नहीं बल्कि सिर्फ “फेक लाइन” बनकर रह गई है।