दो हादसों के बाद भी नहीं जागा प्रशासन! ट्रांसफार्मरों के नीचे सज रही सब्जी मंडी, मौत के साये में व्यापार करने को मजबूर लोग हनुमान चौक और वार्ड नंबर 10 में ट्रांसफार्मर अग्निकांड के बाद भी जिम्मेदार बेखबर, गुजरी बाजार में खुला खतरा, हादसा हुआ तो जिम्मेदार
20 May, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
एक ओर बालाघाट जिला भीषण गर्मी की चपेट में है, दूसरी ओर बढ़ते तापमान के कारण बिजली व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। हाल के दिनों में शहर में ट्रांसफार्मर में आग लगने की दो गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब खतरे की घंटी दो बार बज चुकी है, तब भी जिम्मेदार विभाग और अधिकारी आखिर किस गहरी नींद में सोए हुए हैं?
कुछ दिन पूर्व हनुमान चौक में ट्रांसफार्मर में आग लगने की घटना सामने आई थी। इसके बाद दिनांक 18 मई की रात लगभग 11:40 बजे वार्ड नंबर 10 स्थित अंजुमन शादी हॉल के पास ट्रांसफार्मर में अचानक भीषण आग भड़क उठी थी। आग इतनी विकराल थी कि कुछ ही मिनटों में ऊंची-ऊंची लपटें आसमान तक पहुंचने लगी थीं। अचानक हुई इस घटना से आसपास के रहवासियों में अफरा-तफरी मच गई और लोग भयभीत होकर अपने घरों से बाहर निकल आए थे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि यदि समय पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर नहीं पहुंचती तो एक बड़ा हादसा घट सकता था। फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने जोखिम उठाते हुए आग पर नियंत्रण पाया और संभावित बड़ी जनहानि को टाल दिया। लेकिन सवाल यह है कि जब लगातार घटनाएं सामने आ रही हैं तो प्रशासन और संबंधित विभागों ने सुरक्षा को लेकर अब तक क्या कदम उठाए?
शहर के गुजरी बाजार का दृश्य प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलने के लिए काफी है। यहां जगह-जगह बिजली के ट्रांसफार्मरों के ठीक नीचे सब्जी दुकानों का संचालन किया जा रहा है। बाजार में हर दिन बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे घंटों वहां मौजूद रहते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कोई व्यवस्था नजर नहीं आती।
तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि ट्रांसफार्मर के नीचे ही सब्जी विक्रेता अपनी दुकानें लगाए बैठे हैं। यदि किसी कारणवश अचानक ट्रांसफार्मर में स्पार्किंग या आग लग जाती है तो वहां मौजूद दर्जनों लोग कुछ ही सेकंड में इसकी चपेट में आ सकते हैं। यह स्थिति किसी छोटे खतरे की नहीं बल्कि सीधे-सीधे मौत को दावत देने जैसी प्रतीत होती है।
सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे मामले पर
नगर पालिका प्रशासन और बाजार ठेकेदार की यह लापरवाही जानबूझकर की जा रही लगती है। ठेकेदार मलिक को दुकान लगाने वाले लोगों को समझाकर मना करना चाहिए था। लेकिन वह रसीद काटने और पैसे वसूलने में लगा हुआ है। एक-एक दुकान से रोजाना फीस वसूलता है, लेकिन सुरक्षा का जिम्मा लेने से इनकार। नगर पालिका के अधिकारी कहां हैं? क्या वे बाजार का निरीक्षण करने कभी निकलते भी हैं? या फिर ठेकेदार से मिलीभगत का मुनाफा बांट रहे हैं?ट्रांसफार्मर आग लगने की घटनाएं कोई नई नहीं हैं। देशभर में हर साल सैकड़ों ऐसी घटनाएं होती हैं, जिनमें दर्जनों लोग घायल या मारे जाते हैं। बालाघाट जैसे छोटे शहर में जहां अग्निशमन सेवाएं सीमित हैं, वहां यह जोखिम और बढ़ जाता है। गुजरी बाजार घनी आबादी वाला इलाका है। यहां ट्रांसफार्मर फटने पर न केवल आग फैलेगी, बल्कि ब्लास्ट भी हो सकता है। आसपास के मकान, दुकानें और लोग चपेट में आ जाएंगे। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जान सबसे ज्यादा खतरे में है।
फिर भी जिम्मेदार अधिकारी चुपचाप बैठे हैं। नगर पालिका और बिजली विभाग के अधिकारी कहां सो रहे हैं? क्या उन्हें इस बाजार की हकीकत की खबर नहीं है? या फिर वे जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं क्योंकि ठेकेदार का पैसा उनके जेब में जाता है? यह सवाल पूरे बालाघाट की जनता पूछ रही है। यह मामला केवल एक बाजार का नहीं है। यह पूरे बालाघाट शहर की सुरक्षा का सवाल है। गर्मी के मौसम में बिजली व्यवस्था चरमरा रही है। पुराने ट्रांसफार्मर बदले जा रहे हैं या नहीं? रखरखाव हो रहा है या पैसे बचाए जा रहे हैं? इन सवालों के जवाब मांगने का अधिकार जनता को है। बालाघाट प्रशासन को अब नींद से जगना होगा। गुजरी बाजार से ट्रांसफार्मरों के नीचे की दुकानें तुरंत हटाई जाएं। ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया जाए और उसकी ठेकेदारी रद्द की जाए। बिजली विभाग को सभी ट्रांसफार्मरों का तत्काल निरीक्षण कर रखरखाव सुनिश्चित करना चाहिए।
आज आवश्यकता है कि नगर पालिका, विद्युत विभाग तत्काल संयुक्त कार्रवाई करें। ट्रांसफार्मरों के आसपास सुरक्षा घेरा बनाया जाए, वहां दुकान लगाने पर प्रतिबंध लगाया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है अगर भविष्य में गुजरी बाजार में ट्रांसफार्मर से कोई बड़ा हादसा होता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? प्रशासन, नगर पालिका, बाजार ठेकेदार या फिर वह व्यवस्था जो हर बार हादसे के बाद जागती है?
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