साइबर ठगी मामले में पुलिस-बैंक प्रक्रिया पर बढ़ी पीड़ित की परेशानी...आदेश के महीनों बाद भी खाते में नहीं पहुंचे पैसे... पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर...कोर्ट के आदेश बेअसर..!
22 May, 2026
378 व्यूज
सिवनी नायक दर्पण
साइबर ठगी के एक मामले में न्यायालय द्वारा स्पष्ट आदेश जारी किए जाने के बावजूद पीड़ित को अब तक उसकी 50 हजार रुपये की राशि वापस नहीं मिल सकी है। लंबे समय से पुलिस थाना, बैंक और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच भटक रहे पीड़ित ने अब जल्द न्याय दिलाने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार ग्राम नदौरा निवासी वेदप्रकाश सूर्यवंशी का मोबाइल 9 मई 2024 को छिंदवाड़ा चौक क्षेत्र में कहीं गिर गया था। इसके बाद उनके खाते से करीब 75 हजार रुपये की राशि निकल गई। मामले की शिकायत 11 मई 2024 को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज कराई गई जिसके बाद 50 हजार रुपये की राशि भारतीय स्टेट बैंक के एक खाते में होल्ड कर दी गई थी।
पीड़ित का कहना है कि शिकायत के बाद मामला पहले कोतवाली थाना से लखनवाड़ा थाना और फिर वापस कोतवाली थाना भेजा गया। इस दौरान वे लगातार अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों के संपर्क में रहे लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता रहा।
मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सिवनी श्रीमती कला भमरकर द्वारा 10 सितंबर 2025 को आदेश जारी करते हुए निर्देश दिए गए थे कि होल्ड की गई 50 हजार रुपये की राशि आवेदक के पंजाब नेशनल बैंक खाते में स्थानांतरित की जाए। न्यायालय ने संबंधित थाना प्रभारी को आवश्यक कार्रवाई कर न्यायालय को अवगत कराने के निर्देश भी दिए थे।
आरोप है कि न्यायालय के आदेश के कई माह गुजर जाने के बावजूद अब तक राशि पीड़ित के खाते में जमा नहीं हुई है। पीड़ित वेदप्रकाश सूर्यवंशी का कहना है कि वह कई बार कोतवाली थाना पहुंचा, जहां कभी मेल भेजने तो कभी संबंधित कर्मचारी के अवकाश पर होने की बात कहकर मामला टाल दिया गया।
पीड़ित ने बताया कि उन्होंने मामले की जानकारी एसडीओपी एवं थाना प्रभारी को भी दी लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। लगातार देरी के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अब पीड़ित ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि न्यायालय के आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित कराया जाए और उनकी होल्ड राशि जल्द से जल्द वापस दिलाई जाए, ताकि उन्हें लंबे समय से चल रही परेशानियों से राहत मिल सके।
शेयर करें
लिंक कॉपी हो गया!