विकास कार्य कम, बिल-वाउचर का खेल ज्यादा होने की चर्चा... सरकारी राशि उड़ाने का नया फॉर्मूला या कमीशन का कमाल...?सरपंची की कुर्सी बनी खर्चो का खेलघर...कमीशन की मलाई में दब रहा पंचायत का विकास... स्टेशनरी फोटो कापी के नाम पर सरकारी राशि की बंदरबांट...!

22 May, 2026 404 व्यूज
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नायक दर्पण/सिवनी।

जनपद पंचायत सिवनी की ग्राम पंचायत कलारबांकी में सरपंच पिंकी भरत इनवाती के कार्यकाल में बढ़ रहे काले कारनामे पर जिम्मेदार ने पहना काला चश्मा ओर कमीशन लाओ ओर काला पीला करो की नीति चल रही जनपद सिवनी में लगातार कारनामे सुर्खियों में आने के बाद संज्ञान ना लेना कमीशनखोरी के तरफ ईशारा करता है।

अमृत सरोवर तालाब घोटला बाजार बैठकी नलजल की राशि में घोटला मिठाई के नाम लूट ओर अब स्टेशनरी खरीदी पर लूट पंचायत द्वारा सिवनी के बजाय छपारा से स्टेशनरी सामग्री खरीदा गया आखिर इतनी स्टेशनरी की आवश्यकता क्या थी और उसका वास्तविक उपयोग कितना हुआ।आरोप है कि पंचायत द्वारा स्टेशनरी सामग्री की खरीदी सिवनी से न कर छपारा से की गई, जबकि जिला मुख्यालय और आसपास पर्याप्त दुकानें उपलब्ध हैं।

जब पंचायत में संसाधन उपलब्ध है तो बाहर से फोटो कापी क्यों क्या बहाना फोटो कापी का ओर फायदा स्वयं का...

पंचायत के नाम की आड़ में कहीं निजी उपयोग के लिए सामग्री तो नहीं खरीदी जा रही। पंचायत में जितनी स्टेशनरी खरीदी दिखाई जा रही है उतना कार्य जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता। सरकारी राशि खर्च दिखाकर जेब भरने का नया तरीका अपनाया जा रहा है।

पंचायत कार्यालयों में सामान्य प्रशासनिक कार्य सीमित होते हैं, फिर भी लगातार खरीदी और खर्च के बिल सामने आना कई सवाल खड़े करता है। खरीदी गई सामग्री का रिकॉर्ड, उपयोग और स्टॉक का हिसाब आखिर किसके पास है और क्या जिम्मेदारों ने कभी भौतिक जांच किया।

पंचायत में विकास कार्यों की स्थिति संतोषजनक नहीं है लेकिन कागजों में खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है
मामले में जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल निगरानी और जांच की कमी के कारण पंचायतों में खरीदी ओर फोटो कापी के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। कमीशनखोरी और मिलीभगत के आरोपों ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है।