पत्रकारों पर झूठ सरपंचों ने मचाई लूट। पत्रकार की शिकायतों पर जांच न होने से उठ रहे सवाल। किरनापुर में खुला भ्रष्टाचार का अखाड़ा, सरपंच और अधिकारी मिलकर लूट रहे जनता का खजाना।

24 May, 2026 19 व्यूज
Main Photo

नायक दर्पण/बालाघाट।
किरनापुर ब्लॉक सरपंच संघ के अध्यक्ष प्रकाश बाहे और मडकापार के सरपंच नंदकिशोर चंद्रवंशी समेत अन्य भ्रष्ट तत्वों ने न केवल विकास की राशि को लूटा, बल्कि उनकी करतूतों को उजागर करने वाले साहसी पत्रकारों पर ब्लैकमेलर और वसूलीखोर का ठप्पा लगाकर उनकी इज्जत और आजीविका पर सीधा हमला बोल दिया। लेकिन पुलिस की निष्पक्ष जांच ने इन भ्रष्ट तत्वों के झूठ को बेनकाब कर दिया। अब सवाल यह है कि जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर महोदय इन भ्रष्टाचारियों को क्यों बचा रहे हैं?
नायक दर्पण अखबार के जिला ब्यूरो चीफ संजय अजीत साहसी सहित तीन पत्रकारों के खिलाफ सरपंच संघ ने फर्जी शिकायत की थी। इनमें उन्हें सीएम हेल्पलाइन 181 में फर्जी शिकायतकर्ता बताकर बदनाम करने की कोशिश की गई। परंतु पुलिस ने मामले की गहन जांच के बाद पत्रकारों को पूरी तरह निर्दोष करार दिया। यह घटना भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को कुचलने की साजिश को उजागर करती है।
झूठी शिकायत होने के महज दूसरे दिन ही संजय अजीत ने साहस का परिचय देते हुए कलेक्टर बालाघाट, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बालाघाट और पुलिस अधीक्षक बालाघाट को विस्तृत लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में किरनापुर ब्लॉक की विभिन्न ग्राम पंचायतों में वर्ष 2023 से 2025 तक हुए भारी भ्रष्टाचार का खुलासा किया गया। बिना निविदा निकाले निर्माण कार्य करना, मनरेगा के तहत तालाब निर्माण, सुदूर सड़क निर्माण, 5वें और 15वें वित्त आयोग की राशि, टैक्स वसूली की राशि में अफरा-तफरी, फर्जी बिलों के जरिए राशि का गबन ये सब आरोप खुलकर सामने आए हैं।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि सरपंचों द्वारा खरीदी गई आरो मशीन में भारी राशि का फर्जी बिल लगाया गया। दूसरे मद की राशि को इस मशीन की खरीद में डायवर्ट किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के नाम पर आने वाली जनता की मेहनत की कमाई को इन भ्रष्ट सरपंचों ने अपनी जेबें भरने का जरिया बना लिया। सूत्रों का कहना है कि किरनापुर ब्लॉक में भ्रष्टाचार का ऐसा नेटवर्क चल रहा है कि लाखों-करोड़ों रुपये की राशि का दुरुपयोग हुआ है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें बंद किए बैठे हैं।
महीनों बीत जाने के बावजूद कलेक्टर बालाघाट और जिला पंचायत सीईओ द्वारा कोई उच्च स्तरीय जांच दल गठित नहीं किया गया। शिकायत दायर करने के बाद भी चुप्पी साधे रहना साफ तौर पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का संकेत दे रहा है। स्थानीय सूत्र तो यहां तक कहते हैं कि जिला पंचायत सीईओ स्वयं बड़े कमीशनखोर हैं। पंचायतों से शिकायतें तो आती हैं, लेकिन जांच नहीं कराने के नाम पर भारी-भरकम कमीशन वसूला जाता है। अगर जांच होती भी है तो जांच टीम निष्पक्षता की बजाय ( इतिश्री ) करके फाइलों में दबा देती है।
किरनापुर ब्लॉक सरपंच संघ के अध्यक्ष प्रकाश बाहे और नंदकिशोर चंद्रवंशी जैसे तत्वों को प्रशासनिक संरक्षण मिलने से पूरा सिस्टम सड़ चुका है। ग्रामीणों के विकास के बजाय इनके निजी हित साधे जा रहे हैं। आरो मशीन खरीदी, मनरेगा की मजदूरी, सड़कों का निर्माण, तालाबों का जीर्णोद्धार सब कुछ कागजों में ही सिमटकर रह गया है। असलियत में राशि गबन हो रही है और फर्जी बिलों पर काम पूरा होने के प्रमाण-पत्र जारी किए जा रहे हैं।
संजय अजीत ने अपनी शिकायत में मांग की है कि सभी निर्माण कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। लेकिन जिला प्रशासन की निष्क्रियता से लगता है कि भ्रष्टाचार की इस खेती को बचाने में कुछ बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। जिला पंचायत सीईओ पर सांवलिया निशान खड़ा हो रहा है। क्या वे किरनापुर ब्लॉक सरपंच संघ के झूठे शिकायतकर्ताओं को बचाने में लगे हैं? क्या कमीशन की लालच ने उन्हें इतना अंधा कर दिया है कि वे जनता के हितों को ताक पर रख चुके हैं?
यह मामला केवल किरनापुर ब्लॉक तक सीमित नहीं है। यह पूरे बालाघाट जिले में पंचायती राज व्यवस्था में फैले सड़ांध का प्रतीक है। जब पत्रकार सच्चाई उजागर करते हैं तो उन्हें ब्लैकमेलर बताया जाता है, लेकिन असली ब्लैकमेलर और वसूलीखोर सरपंचों को संरक्षण मिलता है।
अब देखना यह है कि इस समाचार के प्रकाशन के बाद जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर महोदय क्या कार्रवाई करते हैं। क्या उच्च स्तरीय जांच दल गठित होगा? क्या भ्रष्ट सरपंचों और उनके आका अधिकारियों पर गाज गिरेगी? या फिर फाइलें फिर से दबा दी जाएंगी और कमीशनखोरी जारी रहेगी?
नायक दर्पण लगातार इस मामले की निगरानी करेगा। जनता को जानने का अधिकार है कि उनकी मेहनत की कमाई कहां जा रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में हमारा साथ दें। सिस्टम को साफ करने की मांग करें। क्योंकि अगर आज आवाज नहीं उठाई गई तो कल पूरा विकास का ढांचा इन भ्रष्ट तत्वों के चंगुल में फंसकर बर्बाद हो जाएगा।