आरटीओ कार्यालय बना अव्यवस्था और दलालों का अड्डा। भीषण गर्मी में पानी तक नसीब नहीं, गंदगी से परेशान लोग, एजेंटों के भरोसे चल रहा काम !

31 May, 2026 47 व्यूज
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नायक दर्पण/बालाघाट।
जिले का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) इन दिनों अव्यवस्था, गंदगी और एजेंटों के कब्जे का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। आम जनता की सुविधा के लिए बनाए गए इस सरकारी कार्यालय की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि यहां आने वाले लोग खुद को ठगा और परेशान महसूस कर रहे हैं। कार्यालय परिसर में चारों तरफ फैली गंदगी, टूटी व्यवस्था और अधिकारियों की लापरवाही साफ दिखाई दे रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
नायक दर्पण के जिला ब्यूरो प्रमुख संजय अजीत अपने एक मित्र के साथ आरटीओ कार्यालय पहुंचे थे। मित्र को ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित कार्य करवाना था। जैसे ही दोनों कार्यालय परिसर में पहुंचे, वहां का नजारा देखकर हैरान रह गए। कार्यालय के बाहर कचरे के ढेर, फैली गंदगी और बदबू ने सरकारी व्यवस्था की पोल खोल दी। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो महीनों से यहां साफ-सफाई नहीं हुई हो।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि भीषण गर्मी के बावजूद कार्यालय में आने वाले लोगों के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। परिसर में नल तो लगा हुआ है, लेकिन वह केवल दिखावे की वस्तु बनकर रह गया है। लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। जहां एक ओर सरकार आम जनता को बेहतर सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं बालाघाट आरटीओ कार्यालय की यह तस्वीर उन दावों की सच्चाई बयान कर रही है।
आरटीओ कार्यालय में लाइसेंस, फिटनेस, परमिट और अन्य कार्यों के लिए प्रतिदिन सैकड़ों लोग पहुंचते हैं, लेकिन यहां सुविधा के नाम पर केवल अव्यवस्था दिखाई देती है। सूत्र बताते है कि बिना एजेंट के यहां कोई काम आसानी से नहीं होता। कार्यालय में एजेंटों का ऐसा बोलबाला है कि आम आदमी खुद को मजबूर महसूस करता है।
नायक दर्पण टीम के साथ पहुंचे युवक ने बताया कि वह ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आया है और उसका काम एक एजेंट के माध्यम से कराया जा रहा है। युवक ने बताया कि लाइसेंस बनवाने के लिए उससे 4 हजार रुपये लिए जा रहे हैं। उसने बताया कि वह आज केवल हस्ताक्षर और फोटो खिंचवाने आया है। यह खुलासा अपने आप में कई सवाल खड़े करता है कि आखिर लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया में एजेंटों की इतनी बड़ी भूमिका क्यों है? क्या कार्यालय के अधिकारी इस पूरे खेल से अनजान हैं या फिर सब कुछ उनकी जानकारी में चल रहा है?
जब नायक दर्पण के जिला ब्यूरो ने पूरे कार्यालय का निरीक्षण किया तो कई गंभीर कमियां सामने आईं। कहीं व्यवस्था का अभाव दिखा तो कहीं कर्मचारियों की उदासीनता। कार्यालय में आने वाले लोगों को जानकारी देने के लिए उचित व्यवस्था नहीं दिखाई दी। कई लोग दस्तावेजों और प्रक्रिया को लेकर परेशान घूमते नजर आए। वहीं एजेंट खुलेआम लोगों को अपने जाल में फंसाकर मोटी रकम वसूलते दिखाई दिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी इस स्थिति पर मौन क्यों हैं? क्या आम जनता को सुविधाएं देना उनकी जिम्मेदारी नहीं है? भीषण गर्मी में जब लोग पानी के लिए परेशान हों, गंदगी के बीच घंटों खड़े रहने को मजबूर हों और हर काम के लिए एजेंटों का सहारा लेना पड़े, तो ऐसे कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सूत्रों की मानें तो आरटीओ कार्यालय में लंबे समय से एजेंट सक्रिय हैं और आम लोगों को नियमों और प्रक्रिया के नाम पर भ्रमित कर उनसे अधिक पैसे वसूले जाते हैं। यही कारण है कि यहां आने वाला व्यक्ति सीधे काम करवाने के बजाय एजेंट की शरण में जाने को मजबूर हो जाता है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। फिलहाल बालाघाट आरटीओ कार्यालय की बदहाल तस्वीर सरकारी सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
नायक दर्पण की टीम अगले अंक में आरटीओ कार्यालय में सक्रिय एजेंटों, अव्यवस्थाओं और अन्य गंभीर कमियों का बड़ा खुलासा करेगा।