पंचायत के पास अपने क्षेत्र में बने तालाब के अभिलेख नहीं...जांच में पाया तालाब बना किसान की जमीन पर.. तकनीकी स्वीकृति देने वाले जिम्मेदार ने काला चश्मा पहन कर स्थल का सत्यापन किया...नियमों का पालन नहीं हुआ तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी...?

02 Jun, 2026 718 व्यूज
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सिवनी नायक दर्पण

जनपद पंचायत सिवनी की ग्राम पंचायत बांकी में अमृत सरोवर तालाब किसान की जानकारी और सहमति के बिना उसकी भूमि पर तालाब का निर्माण कर दिया गया। जब शिकायत हुई तो जांच में बताया गया कि तालाब संबंधित किसान की भूमि पर बना है।

जो तालाब बना वो घटिया तरीके से जिस नियमों अनुसार निर्माण करना था उसमें भी लापरवाही की गई ऐसा मालूम पड़ता जैसे कमीशन से पेट भरने लीपापोती कर इतिश्री कर सरकारी राशि को मिल बांटकर हजम की गई।

मामले को स्पष्ट करने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत ग्राम पंचायत बांकी से तालाब निर्माण से जुड़े दस्तावेज, स्वीकृतियां, भूमि रिकॉर्ड और अन्य अभिलेख मांगे। लेकिन पंचायत ने यह कहकर मामला टाल दिया कि जानकारी आरईएस विभाग के पास है। इसके बाद आरईएस विभाग से भी सूचना मांगी गई वहां से भी आज तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

जिस तालाब पर सरकारी धन खर्च हुआ उसके दस्तावेज आखिर किसके पास हैं.?यदि पंचायत के पास रिकॉर्ड नहीं हैं और विभाग भी जानकारी देने से बच रहा है तो पारदर्शिता और जवाबदेही की बात केवल कागजों तक सीमित होकर रह जाती है।

यदि पंचायत अपने क्षेत्र में बने लाखों रुपये के निर्माण कार्यो के दस्तावेज ही सुरक्षित नहीं रख पा रही है तो अन्य विकास कार्यो की पारदर्शिता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। की पंचायत के सरपंच सचिव कितने गंभीरता से पंचायत के विकास का योगदान दे रहे होगें।

क्या सिर्फ सरकारी धन से विकास गया भाड़ में खुद का विकास करने ज्यादा रूचि रखी जाती है। जिला पंचायत से लेकर जनपद पंचायत सिवनी सिर्फ कमीशन के लालच में विकास करता है या निरिक्षण भी करता है यह सोचने वाली बात है।

यदि पंचायत अपने क्षेत्र में बने तालाब का रिकॉर्ड तक नहीं रख पा रही है तो अन्य विकास कार्यो की निगरानी और पारदर्शिता का क्या हाल होगा। लोगों का कहना है कि जहां जवाब देने की बारी आती है वहां जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे के पाले में गेंद फेंककर अपनी जिम्मेदारी से बचने लगते हैं। यह सब गांधी छाप कमीशन का कमाल नजर आ रहा है।