जल संकट में प्यासा जिला, मलय वाटर फॉल में लाखों लीटर पानी की होली! लाखों लीटर पानी की बर्बादी, लूट, जुआ और अवैध धंधे का बना अड्डा।
14 Jun, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत भांडी के अंतर्गत ग्राम केरा में संचालित मलय वाटर फॉल जल संकटग्रस्त जिले के लिए खुला घाव बन गया है। एक तरफ जहां जिला प्रशासन ने जल किल्लत के चलते किसानों पर रबी फसल बोने की मनाही लगा दी है, वहीं दूसरी ओर वाटर पार्क के नाम पर लाखों लीटर पानी रोजाना बर्बाद किया जा रहा है। जिम्मेदारों की आंखें बंद हैं, हौसले बुलंद हैं और जनता लुट रही है। सूत्रों का आरोप है कि पार्क के अंदर बने रिसॉर्ट में जुआ खेला जा रहा है और लड़कियां परोसी जा रही हैं, जिससे पूरे जिले का माहौल दूषित हो रहा है।
संचालक द्वारा मनमर्जी वसूली जा रही राशि
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यह वाटर पार्क न केवल पानी की बर्बादी का प्रतीक है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, भ्रष्टाचार और नैतिक पतन का जीता-जागता उदाहरण भी है। जहां पूरा जिला प्यासा है, पेयजल के लिए तरस रहा है, वहां मलय वाटर फॉल में पानी की होली खेली जा रही है। स्लाइड्स, पूल और फव्वारों में पानी का बहाव ऐसा कि देखने वाले का खून खौल उठे। अमोनिया उपचारित पानी का यह अपव्यय पर्यावरण के लिए भी घातक साबित हो रहा है। स्थानीय सूत्र बताते हैं कि बिना किसी उचित अनुमति या पर्यावरणीय मंजूरी के यह पार्क चल रहा है, फिर भी जिला प्रशासन और संबंधित विभाग चुप्पी साधे हुए हैं।
टिकट लूट और पेयजल की अनदेखी
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पार्क में आने वाले पर्यटकों से मनमाने ढंग से टिकट वसूला जा रहा है। नियम के मुताबिक 5 वर्ष से ऊपर के बच्चों के लिए अलग टिकट होना चाहिए, लेकिन यहां बड़े-बच्चे सबके लिए एक समान दर वसूली जा रही है। इससे स्पष्ट है कि संचालक जनता को खुलेआम लूट रहे हैं। एक और हैरान करने वाली बात – पार्क में आने वाले सैकड़ों लोगों के लिए पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि किसी भी सार्वजनिक स्थान पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना बुनियादी जिम्मेदारी होती है, यहां न तो पानी के कूलर हैं, न कोई फिल्टर प्लांट। लोग प्यासे ही लौट रहे हैं, जबकि अंदर पानी की बर्बादी मची हुई है।
रिसॉर्ट बन गया जुआ और वेश्यावृत्ति का अड्डा.?
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सबसे गंभीर आरोप पार्क के अंदर बने रिसॉर्ट को लेकर है। सूत्रों का कहना है कि यहां जुआ चलाया जा रहे हैं और युवतियों को परोसा जा रहा है। रात के अंधेरे में यह जगह जिले के युवाओं को बर्बाद करने का केंद्र बन गई है। स्थानीय युवा और अभिभावक चिंतित हैं। “पानी की किल्लत में किसानों को खेत सूखने दे रहे हैं, लेकिन यहां जुआ और अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। जिला प्रशासन कहां सो रहा है? एक स्थानीय व्यक्ति ने तीखे शब्दों में पूछा।
यह स्थिति जिले के नैतिक वातावरण को विषाक्त कर रही है। स्कूली बच्चे, परिवार और पर्यटक इस जगह पर आ रहे हैं, लेकिन अंदर चल रहे गंदे धंधों की खबर फैलने से पूरे क्षेत्र की छवि धूमिल हो रही है। क्या पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक भी नहीं है? या फिर कोई बड़ा हाथ ऊपर से संरक्षण दे रहा है?
जल संकट बनाम बर्बादी दोहरी नीति
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जिले में पानी की भारी किल्लत है। नदियां, तालाब सूख चुके हैं। किसान रबी फसल लगाने से वंचित हैं, उनकी फसलें जल संकट की भेंट चढ़ रही हैं। प्रशासन ने सख्ती दिखाई – “पानी बचाओ” का नारा दिया, लेकिन मलय वाटर फॉल पर कोई रोक नहीं। लाखों लीटर पानी प्रतिदिन बर्बाद हो रहा है। अगर यही पानी किसानों के खेतों में पहुंचाया जाए तो सैकड़ों हेक्टेयर भूमि हरी-भरी हो सकती है। लेकिन जिम्मेदारों को न किसानों की चिंता है, न जनता की। संचालक के हौसले इतने बुलंद हैं कि कोई शिकायत, कोई जांच, कोई कार्रवाई नहीं। ग्राम पंचायत, ब्लॉक, जिला प्रशासन – सब चुप। क्या यह भ्रष्टाचार का हिस्सा है? या फिर बड़े लोगों के संरक्षण में चल रहा धंधा?
जिले के जागरूक नागरिकों ने की कार्रवाई की मांग ।
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इस समाचार पत्र के माध्यम से हम जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक, जल संसाधन विभाग और पर्यावरण विभाग से मांग करते हैं कि तुरंत मलय वाटर फॉल का निरीक्षण किया जाए। पानी की बर्बादी पर रोक लगाई जाए, रिसॉर्ट में चल रहे अवैध गतिविधियों की जांच हो, टिकट दरों की समीक्षा की जाए और पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यदि जरूरी हुआ तो पार्क को सील किया जाए, जब तक जल संकट समाप्त न हो जाए। जल है तो कल है यह नारा यहां साकार होना चाहिए। किसानों की फसलों को बचाने के लिए, जनता की प्यास बुझाने के लिए और जिले के माहौल को शुद्ध रखने के लिए मलय वाटर फॉल पर तुरंत अंकुश लगना चाहिए। अन्यथा यह बर्बादी और भ्रष्टाचार का प्रतीक बनकर रह जाएगा।
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