स्वच्छ पेयजल के दावों पर लापरवाही जमीनी हकीकत ने बढ़ाई चिंता...जल टंकी में मिली गंदगी नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़...मटमैला पानी और बदहाल सफाई व्यवस्था... जल टंकी की बदहाली उजागर...!
16 Jun, 2026
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सिवनी नायक दर्पण
नगर के श्री मठ मंदिर के पीछे स्थित जल प्रदाय टंकी के निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता विजय नंदन ने नगर पालिका कर्मचारियों के साथ टंकी का निरीक्षण किया, जहां अंदर का पानी मटमैला नजर आया और साफ-सफाई की स्थिति अत्यंत खराब पाई गई। निरीक्षण में यह भी स्पष्ट हुआ कि टंकी के नियमित रखरखाव और स्वच्छता पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
क्षेत्र के हजारों नागरिकों तक पेयजल पहुंचाने वाली इस महत्वपूर्ण जल संरचना की बदहाल स्थिति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नागरिकों का सवाल है कि जब पानी संग्रहित करने वाली टंकी ही साफ नहीं है तो लोगों तक पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता कैसी होगी? यह स्थिति सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से जुड़ा विषय है।
विजय नंदन ने नगर पालिका प्रशासन से टंकी की तत्काल सफाई, आंतरिक पुताई और नियमित रखरखाव की मांग करते हुए कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मुख्य सप्लाई लाइन पर आधुनिक फिल्ट्रेशन सिस्टम स्थापित करने की भी मांग की, ताकि किसी भी प्रकार की अशुद्धि नागरिकों तक न पहुंचे।
निरीक्षण के दौरान टंकी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में रही। उन्होंने टंकी के नीचे घेराबंदी, सुरक्षा प्रबंध और सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग उठाई। उनका कहना है कि सुरक्षा के अभाव में किसी भी प्रकार की दुर्घटना या असामाजिक गतिविधि से इंकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका स्वच्छ पेयजल व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की वास्तविकता कुछ और ही बयां कर रही है। यदि समय रहते टंकी की सफाई, जल गुणवत्ता परीक्षण और सुरक्षा संबंधी उपाय नहीं किए गए तो इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ सकता है।
विजय नंदन ने प्रशासन से मांग की है कि जल टंकी के लिए स्थायी रखरखाव योजना तैयार कर नियमित सफाई, जल परीक्षण और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि नागरिकों को स्वच्छ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध हो सके।
"स्वच्छ जल प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन जब जल स्रोतों की निगरानी और सफाई ही उपेक्षित हो जाए तो प्रशासन की जवाबदेही पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।"
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