पंचायत भवन में कार्यालयीन समय पर जन्मदिन का जश्न...पंचायती राज की गरिमा की धज्जियां...सरपंच-सचिव समेत जनप्रतिनिधियों कर्मचारी की मौजूदगी में हुआ आयोजन...जनपद सीईओ को कराया गया अवगत...!

23 Jun, 2026 712 व्यूज
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नायक दर्पण/​बालाघाट।

जनपद पंचायत बालाघाट के अंतर्गत एक ग्राम पंचायत में पंचायती राज व्यवस्था की गरिमा की धज्जियां उड़ा कर तार-तार किया गया। पंचायत के कार्यालयीन समय के दौरान पंचायत भवन के भीतर सचिव का जन्मदिन मनाया गया जिसमें सरपंच सचिव एवं दूसरे पंचायत सचिव जिला पंचायत सदस्य और जनपद बालाघाट के खंड पंचायत कर्मचारी की शिरकत रही।

पंचायत भवन को सरकारी कार्यालय माना जाता है और वहाँ व्यक्तिगत उत्सवों, विशेषकर केक काटने जैसे कार्यक्रमों का आयोजन कार्यकाल के दौरान वर्जित माना जाता है। उपस्थित जनप्रतिनिधि और कर्मचारियों ने इस अपमान को चुपचाप देखा जिससे पंचायती राज नियमों को मजाक समझा गया।

​सरकारी प्रतीक चिन्ह पर 'केक' काटकर किया अपमान...

​इस आयोजन की सबसे चौंकाने वाली तस्वीर वह रही, जिसमें केक पर 'मध्य प्रदेश पंचायत स्थानीय स्वशासन' का आधिकारिक लोगो (प्रतीक चिन्ह) उकेरा गया था। सार्वजनिक रूप से सरकारी प्रतीक वाले केक को काटकर सचिव ने न केवल कार्यालयीन मर्यादा का उल्लंघन किया बल्कि विभाग की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है।

​जिम्मेदार बने मूकदर्शक ....

​प्राप्त जानकारी के अनुसार जब यह कार्यक्रम पंचायत भवन के भीतर चल रहा था। तब वहाँ सचिव के अलावा सरपंच अन्य ग्राम पंचायत के सचिव जिला पंचायत सदस्य और जनपद पंचायत बालाघाट के कर्मचारी भी मौजूद थे। सरकारी कार्यालय को निजी उत्सव का केंद्र बनते देख किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने इसे रोकने का साहस नहीं किया। जिससे साफ झलकता है कि पंचायती राज के नियमों को यहाँ पूरी तरह ताक पर रख दिया गया था।

​सीईओ को दी गई सूचना कार्रवाई का इंतजार....

​इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी फोटो और वीडियो साक्ष्यों के साथ जनपद पंचायत सीईओ को दी गई थी। तस्वीरों में स्पष्ट रूप से सरकारी लोगो (प्रतीक चिन्ह) वाले केक को काटते हुए सचिव और वहां मौजूद जनप्रतिनिधि-कर्मचारियों का चेहरा देखा जा सकता है। इसके बावजूद अब तक इस गंभीर मामले पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

​क्या सरकारी कार्यालय अब निजी कार्यक्रमों के लिए उपलब्ध हैं...?सरकारी संपत्ति और विभाग के प्रतीक चिन्ह का इस तरह से अपमान करने वालों पर विभाग कब तक चुप्पी साधे रहेगा..? जिम्मेदार अधिकारी अपनी ही व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने वालों को संरक्षण दे रहे हैं..?