पहली बारिश में ही ढह गया भ्रष्टाचार का स्टॉप डेम, कागजों में बना था, पानी में बह गया! कमीशनखोरी की भेंट चढ़ा सरकारी धन, सरपंच से लेकर सीईओ तक की 'जुगलबंदी' ने निर्माण कार्य को बनाया भ्रष्टाचार का मलबे का ढेर।
16 Jul, 2026
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नायक दर्पण/बालाघाट।
जनपद पंचायत बालाघाट के अंतर्गत ग्राम पंचायत धनसुवा के ग्राम ओदा में भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत सामने आया है। जिसने पूरे सरकारी तंत्र की साख को तार-तार कर दिया है। विकास के नाम पर खर्च किए गए 16 लाख रुपये का स्टॉप डेम पहली ही बारिश में ताश के पत्तों की तरह ढह गया। यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि सरपंच, सचिव, उपयंत्री, एसडीओ और जनपद पंचायत सीईओ ममता कुलस्ते की कथित जुगलबंदी से रचा गया सुनियोजित घोटाला है।
ग्रामीणों की चेतावनी को रौंद दिया गया!
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निर्माण शुरू होते ही स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध किया था। उन्होंने साफ कहा था कि चुना गया स्थान तकनीकी रूप से अनुपयुक्त है यहां डेम नहीं टिक सकता। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने ग्रामीणों की आवाज को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। उनकी एकमात्र मंशा जनहित नहीं बल्कि जेब भरना था। परिणाम? 16 लाख रुपये का घोटाला और एक बेकार मलबे का ढेर।
15% कमीशन का खेल और घटिया सामग्री
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सूत्रों के अनुसार जनपद पंचायत बालाघाट में हर निर्माण कार्य पर 15 प्रतिशत कमीशन की सुनियोजित लूट चल रही है। ऊपर तक हिस्सा न पहुंचे तो न वर्क ऑर्डर निकलता है, न भुगतान। इसी कमीशनखोरी की भेंट चढ़ गया 16 लाख का स्टॉप डेम। निर्माण में इतनी घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया कि कंक्रीट के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हुई। सरिया का इस्तेमाल तक नहीं किया गया। मजबूती नाम को भी नहीं थी। पहली बारिश ने पूरी पोल खोल दी।
जिम्मेदारों पर सीधे सवाल
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(ग्राम सचिव): फील्ड पर रहने की जिम्मेदारी के बावजूद गुणवत्ता पर नजर क्यों नहीं रखी?
(उपयंत्री): बिना सही तकनीकी जांच के निर्माण पूर्ण कैसे माना गया और भुगतान कैसे पास किया?
(एसडीओ): कागजों पर ओके रिपोर्ट लगाकर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का खेल कब तक चलेगा?
(सीईओ ममता कुलस्ते): क्या क्षेत्र में हो रहे निर्माण की उन्हें कोई खबर नहीं थी या कमीशन की चाशनी में इतने मस्त हैं कि बड़े घोटालों पर कार्रवाई करना भूल गए?
भ्रष्टाचारियों से वसूली और सख्त कार्रवाई जरूरी
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कागजों पर यह डेम पूर्ण दिखाया गया भुगतान भी हो चुका, जबकि जमीन पर सिर्फ मलबा बचा है। सरकार जल संरक्षण के नाम पर करोड़ों खर्च करने का दावा करती है। वहीं उसके अधिकारी ऐसे कागजी बांध बना रहे हैं जो एक मानसून भी नहीं झेल पाते। यह सिर्फ धन की बर्बादी नहीं, जनता के भरोसे का खून है।
जनता कि मांग
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धनसुवा के ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। दोषियों की संपत्ति जांच हो पूरी रकम वसूल की जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। बालाघाट जिला प्रशासन से सवाल है क्या वह इस भ्रष्ट तंत्र पर लगाम लगाएगा या 16 लाख का यह घोटाला भी एक केस स्टडी बनकर रह जाएगा और जिम्मेदार अधिकारी अगली योजना का कमीशन बांटने में जुट जाएंगे?
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