तीन पंचायतें करोड़ों का खेल: DMF फंड में सेटिंग,आशीर्वाद और लूट की पूरी कहानी।

18 Jan, 2026 77 व्यूज
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(स्पेशल रिपोर्ट)
नायक दर्पण/बालाघाट।
परसवाड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत की ग्राम पंचायत मोहनपुर,कावेली और चालीसाबोड़ी में प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (डीएमएफ) के तहत मिले करोड़ों रुपये का फंड आज विकास की मिसाल नहीं बल्कि प्रशासनिक संरक्षण में पनप रहे भ्रष्टाचार की गवाही देता नजर आ रहा है। सवाल यह नहीं कि काम हुए या नहीं सवाल यह है कि फंड का लाभ इन्हीं तीन पंचायतों तक सीमित क्यों रहा और लगभग सभी निर्माण कार्य एक ही ठेकेदार देवेश पटले को कैसे सौंप दिए गए?

तीन पंचायतें करोड़ों का फंड और एक ही ठेकेदार
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मोहनपुर,कावेली और चालीसाबोड़ी इन दिनों चर्चा में हैं, लेकिन वजह विकास नहीं बल्कि डीएमएफ फंड की कथित लूट खसोट है। जहां एक ओर खनन प्रभावित क्षेत्रों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले इस फंड का उद्देश्य स्वास्थ्य,शिक्षा, सड़क,जल संरक्षण जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास करना है। तो वहीं बालाघाट जिला प्रदेश का प्रमुख खनिज क्षेत्र है जहां डीएमएफ फंड की कोई कमी नहीं लेकिन परसवाड़ा ब्लॉक में यह विकास की बारिश सिर्फ तीन पंचायतों पर ही क्यों बरसी यह बड़ा सवाल है। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि किसी प्रभावशाली नेता के आशीर्वाद के बिना न तो इतनी बड़ी राशि का आवंटन संभव है और न ही बार-बार एक ही ठेकेदार को काम मिलना।

कागजों में विकास जमीन पर पोल खुलती तस्वीर
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मोहनपुर में डीएमएफ फंड से लगभग 7 स्टॉप डैम और 3 सीसी सड़कें बनाई गईं। कावेली और चालीसाबोड़ी में भी स्टॉप डैम, सीसी सड़क और अन्य निर्माण कार्य कराए गए। कुल मिलाकर करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों कि माने तो सीसी सड़कों में कुछ ही महीनों में दरारें और उखड़न दिखाई देने लगी है स्टॉप डैम में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया कई निर्माण कार्य अधूरे या केवल लीपापोती वाले हैं। कागजों में काम पूरा दिखाया गया लेकिन जमीन पर भ्रष्टाचार पूरी तरह उजागर नजर आता है।

टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल
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सबसे गंभीर सवाल यह है कि तीनों पंचायतों में डीएमएफ के लगभग सभी बड़े कार्य एक ही ठेकेदार को क्यों दिए गए? क्या टेंडर प्रक्रिया में वास्तविक प्रतिस्पर्धा हुई? क्या अन्य ठेकेदार अयोग्य थे या जानबूझकर बाहर रखे गए? या फिर पूरा खेल पूर्व निर्धारित सेटिंग के तहत खेला गया?

जिम्मेदार कौन? ठेकेदार या पूरा सिस्टम?
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यदि निर्माण कार्य घटिया है तो जिम्मेदारी केवल ठेकेदार तक सीमित नहीं हो सकती। इसमें सरपंच, सचिव, इंजीनियर, जनपद पंचायत और जिला स्तर के अधिकारी भी बराबर के जिम्मेदार हैं। जिन्होंने या तो आंखें मूंदे रखीं या फिर हिस्सेदारी निभाई।

जांच हुई तो खुलेगी परत-दर-परत सच्चाई
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यदि मोहनपुर, कावेली और चालीसाबोड़ी में डीएमएफ फंड से हुए सभी निर्माण कार्यों की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है। अन्यथा यह मामला आने वाले समय में एक बड़े घोटाले के रूप में सामने आ सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि सच के साथ खड़े होते हैं या फिर चुप्पी के जरिए भ्रष्टाचार को संरक्षण देते रहते हैं।