​पद की मलाई रसूख की धाक उपसरपंच कुर्सी पर कब्जा...पंचायत कोष में सेंधमारी और सरकारी जमीन हड़पी...बिलों से भरा गया निजी खजाना...क्या भाजपा इस महाघोटाले पर संज्ञान लेकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाएगा...?

29 Jul, 2026 55 व्यूज
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सिवनी नायक दर्पण

जनपद पंचायत लखनादौन की ग्राम पंचायत घोघरीकलां में सत्ता के रसूख और पद के दुरुपयोग का दबदबा वर्ष 2006 से लगातार उपसरपंच पद पर काबिज और भाजपा में महामंत्री, मंडल अध्यक्ष से लेकर शासन की योजनाओं के जिला प्रभारी जैसे अहम पदों पर आसीन चंद्रकांत शर्मा वित्तीय अनियमितताओं के साथ सरकारी खजाने को लूटा गया।
पद की हनक का इस्तेमाल करते हुए जरूरतमंदों के हक पर डाका डाला गया और कागजों पर मजदूरी दिखा रहा जबकि परिवार AC में आराम फरमाता रहा परिवार को कागजों में हाजरी भर मजदूरी की राशि लेते रहे।

मनरेगा जॉब कार्ड घोटाले से जुड़ती है। आरोप है कि उपसरपंच रहते हुए वर्ष 2006 में परिवार आईडी-129 में- लक्ष्मी प्रसाद, श्री बाई, प्रमोद नीलम, चंद्रकांत, प्रशांत, सीमा के नाम से केटेगिरी एस टी जनरेटर हुआ। फिर परिवार आईडी-129-A में चंद्रकांत, प्रशांत परिवार आईडी-116 में
रमाकांत, प्रमोद, रजनी, रंजना फिर परिवारआईडी-116-A में प्रमोद, रजनी, पीयूष, हर्षिता परिवार आईडी- 115 में अरूण, सुनिता, अस्तु, प्रियांशु फिर बर्ष 2021 में परिवार आईडी-115-A में प्रियांशु ,रक्षा, हिमाशू बर्ष 2018 में परिवार आईडी-130-C में सरिता, आनंद शर्मा 2006 में जो जाॅब कार्ड बना उसमें कास्ट एसटी का उल्लेख है ओर बर्ष 2018 ओर 2021 में बने जाॅब कार्ड में कास्ट अदर किया गया था।

​हैरानी की बात यह है कि संपन्न पृष्ठभूमि का यह परिवार कभी जमीन पर काम करने नहीं उतरा—वे घर पर आराम फरमाते रहे और पंचायत के कागजों पर उनकी मजदूरी दर्ज होकर सरकारी पैसा खाते में जमा होता रहा।

पंचायत के फंड को निजी बैंक खाते की तरह इस्तेमाल करने का यह खेल सालों से बेरोक-टोक चलता रहा​ जब जॉब कार्ड के फर्जीवाड़े से भी पेट नहीं भरा तो नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए 'शर्मा' के नाम से बिना GST के फर्जी बिल पंचायत में पेश किए गए। रसूख का चाबुक ऐसा चला कि बिना किसी जांच-परख के धड़ाधड़ सरकारी बजट पास होता रहा और सरकारी खजाने की रकम नेताजी की निजी तिजोरी में जमा होती रही।

​रसूख का अलम यह रहा कि नेताजी ने सरकारी जमीनों पर भी डाका डालने से गुरेज नहीं किया। शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा जमाकर तीन बड़े मकान तान दिए गए। हद तो तब हो गई जब चौथे मकान का निर्माण शुरू किया गया। हालांकि, ग्रामीणों की शिकायत के बाद हरकत में आए लखनादौन तहसील प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए निर्माण कार्य स्थगन आदेश जारी कर दिया है जिससे फिलहाल चौथे मकान का काम रुका हुआ है।

सत्ता के नशे और भ्रष्टाचार का ऐसा नंगा नाच होता रहा पर जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी द्वारा काला चश्मा लगा कर नियमों की मटियामेट करवाने में संरक्षण देते रहे।

​जब जॉब कार्ड के फर्जीवाड़े से भी पेट नहीं भरा तो नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए 'शर्मा' के नाम से बिना GST के फर्जी बिल पंचायत में पेश किए गए। रसूख का चाबुक ऐसा चला कि बिना किसी जांच-परख के धड़ाधड़ सरकारी बजट पास होता रहा और सरकारी खजाने की रकम नेताजी की निजी तिजोरी में जमा होती रही।

​लूट का यह खेल किस कदर बेशर्मी से खेला गया इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उपसरपंच चंद्रकांत शर्मा ने मनरेगा को अपनी निजी 'दुकान' बना लिया