विशेष जनसुनवाई में गूंजा शासकीय भूमि में पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष सहित परिवार का कब्जा...अवैध निर्माण पर स्टे ऑर्डर के बाद निर्माण कार्य जारी...अधिकारी कर्मचारी को जानकारी देने के बाद नहींं लिया संज्ञान...!
05 Aug, 2026
16 व्यूज
लखनादौन/सिवनी नायक दर्पण
तहसील लखनादौन के अंतर्गत ग्राम पंचायत घोघरी कला (धूमा) में नेशनल हाईवे से लगी करोड़ों रुपये की बहुमूल्य शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे, स्थायी निर्माण और न्यायालय के स्थगन आदेश की सरेआम अवहेलना का एक गंभीर मामला विशेष जनसुनवाई धनौरा में पहुंचा। इस संबंध में चंद्रपाल शर्मा सहित ग्रामवासियों ने आवेदन देकर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
आवेदकों का आरोप है कि ग्राम पंचायत घोघरी कला के पूर्व उपसरपंच व पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष चंद्रकांत शर्मा तथा उनके परिवार के अन्य सदस्यों (अशोक, प्रमोद, रमाकांत, प्रशांत, सरिता एवं रंजना शर्मा) द्वारा शासकीय खसरा क्रमांक 103/1, 103, 63, 64, 255, 256, 19, 14/2 और 18/2 पर अवैध रूप से कब्जा कर पक्के मकानों का निर्माण और कृषि उपयोग किया जा रहा है।
न्यायालय के स्टे ऑर्डर की उड़ाई जा रही धज्जियाँ
आवेदन के अनुसार, नेशनल हाईवे से सटी बहुमूल्य शासकीय भूमि पर जारी अवैध निर्माण के खिलाफ न्यायालय नायब तहसीलदार लखनादौन (वृत्त धूमा) द्वारा प्रकरण क्रमांक 154/री.ना.तह./2026 में दिनांक 02 जुलाई 2026 को ही अस्थायी स्थगन आदेश जारी किया गया था। इसके बावजूद आरोपियों द्वारा अदालती आदेश को दरकिनार कर दिन-रात निर्माण कार्य बेधड़क जारी रखा गया है।
ग्रामीणों ने शिकायत में उल्लेख किया है कि स्टे ऑर्डर की अवहेलना की सूचना तत्काल नायब तहसीलदार (धूमा), एसडीएम (लखनादौन) और थाना प्रभारी (धूमा) को लिखित एवं दूरभाष के माध्यम से दी गई थी। इसके बावजूद मौके पर निर्माण कार्य नहीं रुकवाया गया जिससे प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली पर मिलीभगत का संदेह हुआ।
राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि का पारदर्शी सीमांकन कराकर हाईवे व शासकीय भूमि से तुरंत अवैध अतिक्रमण हटाया जाए। दंडात्मक कार्रवाई: 02.07.2026 के स्टे ऑर्डर का उल्लंघन करने वालों पर अवमानना और सुसंगत धाराओं में एफआईआर व वैधानिक कार्रवाई हो।
अदालती आदेश के बाद भी निर्माण जारी रहने देने में लिप्त संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों पर विभागीय जांच बैठाई जाए। सीमांकन व बेदखली की पूरी कार्रवाई का पंचनामा और वीडियोग्राफी कराई जाए।
ग्रामवासियों का कहना है कि यदि राजनीतिक दबाव या संरक्षण के कारण मामले में निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई नहीं होती है, तो वे न्याय के लिए माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में याचिका दायर करेंगे। इसकी संपूर्ण प्रशासनिक व विधिक जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
शेयर करें
लिंक कॉपी हो गया!