महारास प्रसंग में झलकी जीव–परमात्मा के मिलन की दिव्यता..महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ भक्तिमय समापन

18 Jan, 2026 19 व्यूज
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कान्हीवाड़ा /सिवनी।नायक दर्पण
कान्हीवाड़ा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान गोवर्धन पूजा एवं महारास कथा का भव्य और भावनात्मक आयोजन श्रद्धा व आस्था के साथ संपन्न हुआ। विशाल पंडाल में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। कथा स्थल को पुष्प मालाओं, रंगीन गुब्बारों एवं धार्मिक चित्रों से आकर्षक रूप से सजाया गया था।
कथा वाचक पूज्य आचार्य हेमंत कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। गोवर्धन पर्वत धारण प्रसंग में उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव के अभिमान को चूर कर ब्रजवासियों की रक्षा की। महाराज श्री ने कहा कि गोवर्धन पूजा प्रकृति संरक्षण, कर्मनिष्ठा और ईश्वर में अटूट विश्वास का प्रतीक है।
इसके पश्चात महारास प्रसंग का मनोहारी वर्णन करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि महारास केवल नृत्य नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का दिव्य प्रतीक है। रासलीला के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने प्रेम, त्याग, समर्पण और निष्काम भक्ति का मार्ग प्रशस्त किया।
कथा के दौरान पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर कथा श्रवण करते नजर आए। “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के गगनभेदी जयघोष से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो उठा। अनेक श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर झूमते दिखाई दिए।
कार्यक्रम के समापन पर महाआरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में संस्कार, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।