आजादी के दशकों बाद भी सड़क-पुल से वंचित जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे स्कूली बच्चे ग्रामीणों की पुकार—आखिर कब जागेगा प्रशासन.....!

08 Sep, 2026 81 व्यूज
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मंडला/नारायणगंज नायक दर्पण

आजादी के दशकों बाद भी जिले के नारायणगंज तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत सिकोसी के पोषक ग्राम बोरिया के ग्वारी टोला में विकास की तस्वीर बेहद चिंताजनक नजर आ रही है। ग्रामीण आज भी सड़क और सुरक्षित पुल-पुलिया जैसी मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क एवं पुल निर्माण की मांग को लेकर ग्राम पंचायत से लेकर तहसील, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

सबसे गंभीर स्थिति स्कूली छात्र-छात्राओं की है। शिक्षा हासिल करने के लिए स्कूल जाने वाले बच्चों को आवागमन के दौरान नदी पार करनी पड़ती है। बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने से बच्चों और ग्रामीणों के लिए यह रास्ता और अधिक जोखिमपूर्ण हो जाता है। सामने आए फोटो और वीडियो में ग्रामीणों तथा स्कूली बच्चों को नदी पार करते देखा जा सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल के अभाव का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है। बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, वहीं मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी परेशानी होती है। आपातकालीन स्थिति में वाहन गांव तक पहुंच पाएगा या नहीं, यह भी एक बड़ा सवाल बना रहता है।

सरकारी पोर्टल पर विकास कार्य, लेकिन सड़क-पुल का समाधान कहां...?
ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम पंचायत सिकोसी से संबंधित सरकारी पोर्टल पर बोरिया में विभिन्न विकास कार्य दर्ज हैं, लेकिन जिस सड़क और पुल की आवश्यकता ग्रामीण वर्षों से बता रहे हैं, उसका समाधान अब तक जमीन पर दिखाई नहीं देता। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर विकास की योजनाओं का लाभ ग्वारी टोला तक कब पहुंचेगा..?

ग्रामीणों की सरकार से गुहार बच्चों को कब मिलेगा सुरक्षित रास्ता.....?
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया जाए और ग्वारी टोला में सड़क के साथ आवश्यक पुल या पुलिया का निर्माण कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास की तस्वीर तभी पूरी मानी जाएगी, जब गांव के अंतिम छोर तक सुरक्षित आवागमन की सुविधा पहुंचे। सवाल सिर्फ सड़क और पुल का नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और ग्रामीणों की सुरक्षा का भी है।

अब ग्रामीणों की एक ही पुकार है....कोई तो हमारी सुन लो सरकार...बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करने से आखिर कब मिलेगी मुक्ति...!