कोसमी की चरनोई भूमि पर ‘खेल’ का आरोप, प्रशासनिक कार्रवाई सुस्त.....पूर्व सरपंच ओंकार माहुले ने कलेक्टर से की शिकायत, निर्माण पर तत्काल रोक की मांग...!

18 Sep, 2026 11 व्यूज
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नायक दर्पण/बालाघाट।
ग्राम पंचायत कोसमी बंदर झरिया की शासकीय चरनोई भूमि को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता कोसमी निवासी पूर्व सरपंच ओंकार माहुले ने कलेक्टर बालाघाट के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत की महत्वपूर्ण शासकीय भूमि में से करीब 3800 वर्गमीटर लगभग एक एकड़ भूमि नगर पालिका बालाघाट को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण के लिए दिए जाने की प्रक्रिया की गई है। शिकायतकर्ता ने इस पूरी कार्रवाई में नियमों की अनदेखी और ग्रामीणों को विश्वास में नहीं लिए जाने का आरोप लगाते हुए तत्काल निर्माण कार्य रुकवाने की मांग की है।
शिकायत में ग्राम पंचायत कोसमी की पी.एच. नं. 18/46, खसरा नं. 128/3, कुल रकबा 16640 वर्गमीटर भूमि का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस भूमि में से लगभग 3800 वर्गमीटर हिस्सा नगर पालिका को लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण हेतु दिए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता ने इसे चरनोई भूमि से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए प्रशासन से पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है।

2016 के आदेश का भी दिया हवाला......!

शिकायत में वर्ष 2016 में तत्कालीन कलेक्टर श्री भरत यादव द्वारा पारित आदेश दिनांक 20 अप्रैल 2016 का हवाला दिया गया है। एवं उक्त भूमि का उपयोग वोल्टेज विद्युत व्यवस्था से संबंधित कार्य, ट्रांसफार्मर लगाने आदि के लिए आवंटित किया जा चुका था। ऐसे में उसी रकबा की शेष बची चरनोई भूमि का दोबारा आदेश कैसे हो सकता है।

ग्रामीणों को जानकारी नहीं देने का आरोप......!

शिकायत का सबसे गंभीर सवाल यह है कि भूमि दिए जाने के संबंध में ग्राम कोसमी की जनता से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। शिकायत में ग्राम पंचायत की सरपंच अबिका गगन नगपुरे एवं संबंधित जिम्मेदार अधिकारी और नगर पालिका के बीच सांठगांठ का आरोप भी लगाया गया है। शिकायत के अनुसार 20 अगस्त 2026 को अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने इस पूरी प्रक्रिया की जांच कर दस्तावेजों एवं नियमों की वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।

छोटे किसानों के रास्ते पर भी असर की आशंका......!

शिकायतकर्ता ने शिकायत में यह भी कहा है कि ग्राम पंचायत कोसमी में इस चरनोई घास
शासकीय भूमि के अलावा अन्य भूमि नहीं है। यदि नगर पालिका को भूमि दे दी जाती है तो आसपास मौजूद छोटे-लघु कृषकों की जमीन और उनके आवागमन के रास्ते पर असर पड़ने की आशंका है। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से भूमि के वास्तविक उपयोग, सीमांकन और ग्रामीण हितों की स्थिति की जांच कराने की मांग की है।

25 जून के आदेश को निरस्त करने की मांग.......!

शिकायत के अनुसार 25 जून 2026 को जारी आदेश को निरस्त करने तथा निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वह मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में जनहित याचिका दायर करने के लिए विवश होगा।
शिकायत के साथ 25 जून 2026 के कलेक्टर कार्यालय के आदेश, 20 अप्रैल 2016 के आदेश तथा 20 अगस्त 2026 के अनापत्ति प्रमाण-पत्र की प्रतियां संलग्न किए जाने का उल्लेख है। दस्तावेज में 9 सितंबर 2026 को सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी का भी उल्लेख किया गया है।
अब पूरे मामले में निगाहें जिला प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं। चरनोई भूमि, पुराने आदेश, नई एनओसी और प्रस्तावित निर्माण इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई या नहीं।