कागजों पर डॉक्टर कुर्सी पर कम्पाउंडर सरकारी आयुर्वेद अस्पताल में मरीजों की सेहत से खिलवाड़.....30 बिस्तरीय अस्पताल में झोलाछाप शैली का राज....!
20 Sep, 2026
21 व्यूज
लखनादौन/सिवनी
सिवनी जिले के लखनादौन में 30 बिस्तरीय शासकीय आयुर्वेद चिकित्सालय इन दिनों इलाज से ज्यादा अपने कारनामों की वजह से सुर्खियों में है। कहने को तो यहाँ दो-दो आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी तैनात हैं, लेकिन धरातल पर मरीजों का इलाज 'औषधि संयोजक' (कम्पाउंडर) योगेश गुर्देकर के भरोसे चल रहा है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब अस्पताल में डॉक्टर मौजूद हैं, तो मरीजों की नाड़ी पकड़ने और दवा लिखने का अधिकार कम्पाउंडर को किस नियम के तहत मिला.?
साहब' नदारद कम्पाउंडर बने 'वैद्य जी......
अस्पताल में डॉ. रेखा कर्वेती और डॉ. दीक्षा धुर्वे (RMD) की पदस्थापना है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का आरोप है कि ओपीडी में मरीजों को जांचने से लेकर दवा देने तक का काम कम्पाउंडर ही निपटा रहे हैं। नियम कहते हैं कि औषधि संयोजक का काम सिर्फ डॉक्टर की मदद करना और दवा वितरण संभालना है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या विभाग ने कम्पाउंडर को डॉक्टर की भूमिका निभाने की कोई गुप्त लिखित छूट दे रखी है..?
हाजिरी रजिस्टर खोलेगा डॉक्टरों की अनुपस्थिति का राज....!
अस्पताल में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या डॉक्टर सिर्फ कागजों में उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं? स्थानीय नागरिकों की मांग है कि अगर आयुष विभाग ईमानदारी से डॉक्टरों के उपस्थिति रजिस्टर और ओपीडी (OPD) रिकॉर्ड की जांच करे, तो सच खुद-ब-खुद सामने आ जाएगा।
30 बिस्तर का अस्पताल पर मरीज गायब क्यों.?
लाखों-करोड़ों की लागत से बने 30 बिस्तरीय अस्पताल में मरीजों का न पहुंचना खुद पूरी व्यवस्था पर बड़ा तमाचा है। लोगों का कहना है कि जब अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं मिलेंगे और इलाज कम्पाउंडर के भरोसे रहेगा, तो मरीज यहाँ क्यों आएंगे? सही इलाज और दवाओं का अभाव ही मरीजों की घटती संख्या की मुख्य वजह है।
जांच की उठती मांग: दवाओं का स्टॉक और वितरण भी संदेह के घेरे में.....!
मरीजों को समय पर आयुर्वेदिक दवाएं मिल रही हैं या स्टॉक रजिस्टर में ही गोलमाल हो रहा है, इसकी भी जांच जरूरी है।अब गेंद जिला आयुष अधिकारी के पाले में है क्या पूरे मामले का निष्पक्ष निरीक्षण कर ओपीडी रिकॉर्ड, उपस्थिति रजिस्टर और दवाओं के स्टॉक की पड़ताल की जाएगी, या फिर लखनादौन का यह अस्पताल यूं ही 'कम्पाउंडर भरोसे चलता रहेगा.?
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