शिकायत पर शिकायत आदेश पर आदेश…फिर भी कार्रवाई शून्य....फरियादी के चक्कर काटने के बावजूद जिम्मेदारों की नहीं खुली नींद....पत्राचार जारी समस्या जस की तस...!

11 Oct, 2026 33 व्यूज
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नायक दर्पण मंडला।

नैनपुर में सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक परिवार अपने पड़ोसी के मकान के पास खड़े नीम के पेड़ की डालियों से परेशान है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पेड़ की डालियां कई बार टूटकर उसके मकान की छत पर गिर चुकी हैं। इससे मकान को नुकसान पहुंचने के साथ ही परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। मामले में शिकायत, आवेदन और अधिकारियों के पत्राचार के बावजूद अब तक समस्या का स्थायी निराकरण नहीं होने का दावा किया जा रहा है।

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार वार्ड क्रमांक 15 निवासी जितेंद्र कुमार सोनी ने पड़ोसी के मकान के पास स्थित नीम के पेड़ की डालियों को लेकर प्रशासन से शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया कि तेज आंधी-तूफान और बारिश के दौरान पेड़ की डालियां टूटकर उनके मकान की छत पर गिरती हैं। शिकायतकर्ता ने पेड़ की डालियों की छंटाई अथवा आवश्यक कार्रवाई कराने का अनुरोध किया ताकि भविष्य में किसी बड़ी घटना की आशंका को टाला जा सके।

शिकायत में पूर्व की घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया गया कि वर्ष 2020, 2021 और 2024 सहित अलग-अलग अवसरों पर आंधी-तूफान के दौरान पेड़ की डालियां टूटकर मकान पर गिरीं। शिकायतकर्ता के अनुसार इन घटनाओं से मकान को नुकसान पहुंचा और परिवार को बार-बार परेशानी का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि उन्होंने संबंधित पक्ष को भी समस्या से अवगत कराया लेकिन समाधान नहीं निकलने पर प्रशासन का दरवाजा खटखटाना पड़ा।शिकायतकर्ता ने यह भी आशंका जताई है कि पेड़ की डालियां छत पर गिरने से मकान को और नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए समय रहते आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।

मामले से जुड़े दस्तावेज बताते हैं कि नगर परिषद नैनपुर ने 13 जुलाई 2026 को संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई के लिए आवेदन अग्रेषित किया। इसके बाद 11 सितंबर 2026 को आयोजित मुख्यमंत्री जनविश्वास शिविर में भी मामला पहुंचा। शिविर के संदर्भ में नगर परिषद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी ने 16 सितंबर 2026 को वन परिक्षेत्र अधिकारी नैनपुर को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
अब सवाल यह है कि जब शिकायत प्रशासन तक पहुंच चुकी थी और संबंधित विभाग को पत्र भी भेजे जा चुके थे तो समस्या का निराकरण किस स्तर पर अटका हुआ है? क्या संबंधित अधिकारी ने स्थल निरीक्षण किया? क्या पेड़ की स्थिति का आकलन किया गया? यदि कार्रवाई हुई है, तो शिकायतकर्ता को राहत क्यों नहीं मिली? और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो जिम्मेदारी किसकी है?

मुख्यमंत्री जनविश्वास शिविर का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान करना है। ऐसे में शिकायत के बाद पत्राचार होना तो प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन नागरिक को वास्तविक राहत मिलना ही निराकरण की कसौटी है। यदि आवेदन एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक पहुंचते रहें और समस्या जस की तस बनी रहे तो जनसुनवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग मामले का मौके पर निरीक्षण करे पेड़ की डालियों से उत्पन्न खतरे का आकलन करे और नियमानुसार उचित कदम उठाए।आदेशों के बावजूद समस्या का समाधान क्यों नहीं हो पाया।