आमजन ने खोला रेल सुविधाओं के लिए मोर्चा...बाजार बंद जनता सड़क पर ट्रेनों के ठहराव की उठी बुलंद आवाज...न नेता न राजनीतिक चेहरा जनता ने खुद संभाली आंदोलन की कमान...!
18 Oct, 2026
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क्षेत्र की लंबे समय से उपेक्षित रेल सुविधाओं और पलारी रेलवे स्टेशन पर सभी एक्सप्रेस ट्रेनों के नियमित ठहराव की मांग को लेकर शुक्रवार16 अक्टूबर को क्षेत्र का जनमानस पूरी तरह मुखर नजर आया। करीब डेढ़ सौ गांवों के लगभग 2500 ग्रामीणों और समस्त व्यापारियों ने सुबह से ही अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर एक अनूठा और अनुशासित जन-आंदोलन खड़ा कर दिया। इस आंदोलन की सबसे बड़ी और खास बात यह रही कि इसके पीछे कोई राजनीतिक चेहरा या बड़ा नेता नहीं था बल्कि क्षेत्र की जनता ने खुद कमान संभालकर अपनी आवाज बुलंद की।दोपहर करीब 2 बजे नागपुर जोन के डीसीएम अनिल एल. नागले और तहसीलदार (राजस्व) मौके पर पहुँचे। अधिकारियों ने जनसमुदाय से औपचारिक रूप से ज्ञापन स्वीकार किया।
सिवनी/पलारी नायक दर्पण
रेल सुविधाओं की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर पलारी रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार 16 अक्टूबर को जनआक्रोश का बड़ा नजारा देखने को मिला। क्षेत्र के करीब 150 गांवों के लगभग 2500 ग्रामीणों और व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर एकजुटता के साथ आंदोलन किया। आंदोलन का सबसे खास पहलू यह रहा कि यहां किसी बड़े राजनीतिक चेहरे या प्रमुख नेता के नेतृत्व की जगह आम जनता स्वयं अपनी मांगों की आवाज बुलंद करती नजर आई।पलारी रेलवे स्टेशन पर सभी एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर ग्रामीणों और व्यापारियों ने एकजुट होकर रेलवे प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। बाजार बंद रखकर किए गए इस प्रदर्शन ने स्पष्ट संदेश दिया कि क्षेत्र के लोग अब रेल सुविधाओं की अनदेखी को लेकर चुप बैठने के मूड में नहीं हैं। आंदोलनकारियों ने रेलवे से पलारी क्षेत्र की वर्षों से लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार कर ठोस निर्णय लेने की अपील की।
आंदोलन स्थल पर दोपहर करीब 2 बजे नागपुर जोन के डीसीएम अनिल एल.नागले पहुंचे। उनके साथ तहसीलदार (राजस्व) भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने आंदोलनकारियों और उपस्थित जनसमुदाय से ज्ञापन प्राप्त किया। ज्ञापन में पलारी रेलवे स्टेशन पर सभी एक्सप्रेस ट्रेनों के नियमित ठहराव की प्रमुख मांग उठाई गई।पलारी में हुआ यह आंदोलन क्षेत्रीय एकजुटता का संदेश दे गया। ग्रामीणों और व्यापारियों ने अपनी सामूहिक ताकत के जरिए रेल सुविधाओं की आवश्यकता को सामने रखा है। अब निगाहें रेलवे प्रशासन पर टिकी हैं
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