2022 से अक्टूबर 2026 तक के निर्माण कार्यों की जांच के लिए जनपद सीईओ को सौंपा आवेदन, नाली से लेकर शौचालय निर्माण तक की गुणवत्ता पर सवाल।

27 Oct, 2026 48 व्यूज
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बालाघाट नायक दर्पण

किरनापुर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मड़कापार में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निविदा प्रक्रिया और शासकीय राशि के भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। पंचायत के विभिन्न निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग करते हुए ग्रामीणों ने जिला पंचायत सीईओ सहित जनपद पंचायत किरनापुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आवेदन सौंपा है। शिकायतकर्ताओं ने वर्ष 2022 से अक्टूबर 2026 तक कराए गए निर्माण कार्यों और संबंधित भुगतानों की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पंचायत सचिव और सरपंच द्वारा विभिन्न निर्माण कार्यों के भुगतान में नियमों का पालन किया गया या नहीं, इसकी जांच आवश्यक है। शिकायतकर्ताओं ने बिलों में जीएसटी, कोटेशन की उपलब्धता तथा संबंधित फर्मों के दस्तावेजों की जांच कराने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि संबंधित अभिलेखों की पड़ताल के बिना भुगतान की प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का समाधान संभव नहीं है।

नाली निर्माण से लेकर शौचालय तक जांच के घेरे में

शिकायत में पंचायत के वार्ड क्रमांक 02 में सीसी नाली निर्माण की जांच कराने की मांग की गई है। इसके अलावा वर्ष 2024 में निर्मित स्टॉप डैम की गुणवत्ता की जांच का मुद्दा भी उठाया गया है। ग्रामीणों ने सुदूर सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग करते हुए निर्माण की वास्तविक स्थिति और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड का मिलान करने पर जोर दिया है।
आवेदन में वार्ड क्रमांक 07 में सीसी नाली के नाम पर लगभग 45 हजार रुपये के भुगतान का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस राशि के आहरण और कार्य की वास्तविक स्थिति की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित अभिलेखों के आधार पर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुरूप हुआ था या नहीं।

लाखों के शौचालय निर्माण पर भी उठे सवाल।

शिकायत में आवास टोला में वर्ष 2026 में निर्मित सामुदायिक शौचालय की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की गई है। वहीं, लगभग 90 हजार रुपये की लागत से वर्ष 2022 में निर्मित सामुदायिक शौचालय और करीब 3 लाख 44 हजार रुपये की राशि से बने सामुदायिक स्वच्छता परिसर के निर्माण कार्यों की भी जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन निर्माण कार्यों से जुड़े बिल, माप पुस्तिका, भुगतान विवरण और स्थल निरीक्षण के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए। यदि किसी कार्य में गुणवत्ता की कमी या वित्तीय अनियमितता मिलती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

निविदा प्रक्रिया पर भी सवाल

आवेदन में वर्ष 2022 से 2026 तक पंचायत द्वारा जारी निविदाओं की जानकारी की जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने पूछा है कि कितने ठेकेदारों, वेंडरों और दुकानदारों ने निविदा प्रक्रिया में भाग लिया, कितनों ने काम लेने के लिए आवेदन किया तथा किन फर्मों को काम मिला। साथ ही, निविदा में भाग नहीं लेने वाली फर्मों से संबंधित भुगतान की स्थिति की भी जांच करने की मांग की गई है।

जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

शिकायतकर्ताओं ने जनपद पंचायत सीईओ से आवेदन में उठाए गए सभी बिंदुओं पर दस्तावेजी जांच, निर्माण स्थलों का निरीक्षण और भुगतान रिकॉर्ड का सत्यापन कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जांच के जरिए वास्तविक स्थिति सामने आती है या नहीं।
फिलहाल ये सभी बिंदु शिकायत में लगाए गए आरोप और जांच की मांग हैं। निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट होगा कि निर्माण कार्यों और भुगतान में नियमों का पालन हुआ है या कहीं अनियमितता हुई है।