फर्जी डॉक्टरों का खेल: कपड़ों की दुकान के पीछे चल रहा था मरीजों की सांसों का सौदा कपड़े की दुकान के पास खुलेआम चढ़ रही थीं ग्लूकोज की बोतलें। मौके से भारी मात्रा में संदिग्ध दवाइयों का जखीरा 'निरीक्षण के फरमान' कागजों तक सीमित, धरातल पर झोलाछाप बेखौफ।

04 Nov, 2026 127 व्यूज
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सिवनी नायक दर्पण

जिले के ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य विभाग के सख्त निर्देशों की धज्जियां किस तरह उड़ाई जा रही हैं, इसकी बानगी छपारा विकासखंड के भीमगढ़ कॉलोनी में देखने को मिली है। एक तरफ स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों और क्लीनिकों पर नकेल कसने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है वहीं दूसरी ओर रिहायशी बस्तियों और कपड़े की दुकानों के समीप झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की जिंदगी के साथ सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं।

​कपड़ों की दुकान बनी अस्पताल....

​ताजा मामले के मुताबिक रविवार को साप्ताहिक बाजार के दौरान भीमगढ़ कॉलोनी में एक हैरान कर देने वाला नजारा सामने आया। यहां एक कपड़े की दुकान के पास खुले आसमान के नीचे और रिहायशी परिसर के समीप एक बुजुर्ग मरीज को ग्लूकोज की बोतल चढ़ाई जा रही थी। इतना ही नहीं, मौके पर भारी मात्रा में दवाइयों का अवैध भंडार भी मिला है। सवाल यह उठता है कि जिस जगह पर कपड़े बिकने चाहिए, वहां इंसानी जिंदगियों से इस तरह का खिलवाड़ किस अधिकार के तहत किया जा रहा है?

​बीएमओ ने दिया जांच का आश्वासन.....

​इस गंभीर मामले की शिकायत जब छपारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) श्री इनवाती को दूरभाष पर दी गई, तो उन्होंने शिकायत मिलने की बात स्वीकार करते हुए त्वरित जांच और कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। हालांकि, उनका यह तर्क भी सामने आया कि रविवार होने के कारण भीमगढ़ स्थित 'आरोग्य धाम' बंद रहता है—लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या साप्ताहिक अवकाश के दिन झोलाछाप डॉक्टरों को जनता की जान से खेलने का लाइसेंस मिल जाता है?

​अब कार्रवाई की बारी.....

​जिले में फल-फूल रहे इन तथाकथित डॉक्टरों की कोई चिकित्सकीय योग्यता (Medical Degree) है या नहीं, उनके पास क्लीनिक चलाने का वैध पंजीयन है या नहीं, और भारी मात्रा में दवाओं का यह जखीरा वहां कैसे पहुंचा—इन तमाम सवालों के जवाब अब स्वास्थ्य विभाग को देने होंगे। यदि समय रहते इन पर लगाम नहीं कसी गई, तो ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों की जान पर मंडराता यह खतरा और भी विकराल रूप ले सकता है।