प्रशासन की भारी लापरवाही: सरकारी गोदामों में सड़ गया 15 हजार क्विंटल गेहूं, 50 करोड़ के नुकसान की आशंका

24 Jan, 2026 36 व्यूज
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नायक दर्पण, मंडला।
मंडला जिले में सरकारी अनाज की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। किसानों से खरीदा गया लगभग 15 हजार क्विंटल गेहूं बीते 21 महीनों से गोदामों में यूं ही पड़ा-पड़ा सड़ रहा है। समय पर उठाव, निगरानी और कीटनाशक छिड़काव न होने से अब गेहूं में घुन लग चुका है और गुणवत्ता पूरी तरह खराब हो गई है। इस गंभीर चूक से सरकारी खजाने को 50 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार नैनपुर, बम्हनी और बिछिया क्षेत्र के करीब 9 सरकारी गोदामों में यह गेहूं लंबे समय से भरा पड़ा है। गोदाम महीनों तक बंद रहे, न कोई निरीक्षण हुआ और न ही रखरखाव पर ध्यान दिया गया। मामला उजागर होते ही विभाग में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में गेहूं की सफाई का काम शुरू कर दिया गया।
21 महीने पुराना गेहूं, बोरियों से झड़ने लगा आटा
नागरिक आपूर्ति निगम के डीएम श्री हेमंत वर्मा ने स्वीकार किया कि गोदामों में करीब 1500 मीट्रिक टन गेहूं ऐसा है जो लगभग 21 महीने पुराना हो चुका है। हालत यह है कि बोरियों में रखे गेहूं की ऊपरी परत अब आटे के रूप में झड़ने लगी है। उन्होंने कहा कि लापरवाही से जो भी नुकसान होगा, उसकी भरपाई संबंधित गोदाम संचालकों से की जाएगी।
खराब गेहूं जनता को बांटने की तैयारी!
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी पुराने और संदिग्ध गुणवत्ता वाले गेहूं को अब राशन दुकानों के माध्यम से बांटने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सफाई और छंटनी के बाद लैब जांच कराई जाएगी और गुणवत्ता सही पाई गई तो ही वितरण होगा। लेकिन इतने लंबे समय से सड़े अनाज को लेकर आम जनता और विशेषज्ञों में गहरी चिंता है।
अब सवाल यह है—
👉 इतने बड़े स्तर की लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन?
👉 क्या जनता की सेहत से समझौता किया जाएगा?
👉 क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या मामला दबा दिया जाएगा?